Indian Oil Company: भारत में पेट्रोल आज के दौर में एक आम जरूरत बन गया है। भारत में पहली बार पेट्रोल का खजाना मिला था उसकी शुरुआत रेलवे ट्रैक से हुई थी। 1867 में रेलवे लाइन बिछाते समय भारत में पहली बार पेट्रोलियम ऑयल मिला। उसके बाद भारत में तेल का कारोबार शुरू हुआ। भारत में हर रोज 59 करोड़ लीटर पेट्रोल बिकता है। इसमें 24 करोड़ लीटर की हिस्सेदारी इंडियन ऑयल के पास है। देशभर में सबसे ज्यादा 71,000 फ्यूल स्टेशन इंडियन ऑयल के पास हैं। भारत के अलावा यह श्रीलंका, मिडिल ईस्ट, मॉरिशस में भी मौजूद है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड का 50 फीसदी से ज्यादा शेयर भारत सरकार के पास है। यह सरकार की 11 महारत्न कंपनियों में से एक है।
इंडियन ऑयल
डिगबोई में पहली पेट्रोलियम ऑयल रिफाइनरी बनी
1867 में रेलवे लाइन बिछाते समय भारत में पहली बार पेट्रोलियम ऑयल मिला। इसके 33 साल बाद 1901 में असम के डिगबोई में पहली बार भारत में पेट्रोलियम ऑयल रिफाइनरी बनाई गई। असम के डिग्बोई में इंडियन ऑयल के रिफाइनरी सेंटर को दुनिया में सबसे पुराना माना जाता है। सबसे पहले 1958 में भारत सरकार ने सोवियत संघ (आज का रूस) और रोमानिया की मदद से इंडियन रिफाइनरी लिमिटेड शुरू किया। इंडियन रिफाइनरी लिमिटेड ही आगे चलकर इंडियन ऑयल कंपनी से मिलकर आज की इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन बनी।
ऐसे बनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन
दुनियाभर में तेजी से इंडस्ट्राइलाइजेशन हो रहा था। भारत भी इस रेस में दौड़ लगा रहा था। इससे देश में पेट्रोलियम उत्पाद की मांग बढ़ी जिससे सरकार पर फ्यूल का खर्चा बढ़ने लगा। सरकार ने तब देश की सभी प्राइवेट पेट्रोलियम कंपनियों पर पेट्रोलियम उत्पाद के इंपोर्ट और एक्सपोर्ट पर रोक लगा दिया। नतीजतन इंडियन ऑयल का इंपोर्ट पर अकेले कब्जा हो गया।
