Fortified Rice Ban News: केंद्र सरकार ने ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ (PMGKAY) और दूसरी सरकारी योजनाओं के तहत बांटे जाने वाले चावल में पोषक तत्व मिलाने यानी फोर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है। यह फैसला एक नई वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम लोगों के हित में और चावल की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर उठाया गया है। सरकारी बयान के अनुसार, यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि लंबे समय तक गोदामों में रखे रहने से चावल में मिलाए गए पोषक तत्वों में कमी पाई गई।
सरकार ने फोर्टिफाइड चावल की प्रक्रिया पर लगाई अस्थायी रोक (तस्वीर-istock)
क्या है प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत देश के करोड़ों गरीब परिवारों को मुफ्त या रियायती दर पर अनाज दिया जाता है। इस योजना का मकसद जरूरतमंद लोगों तक भोजन और पोषण की सुरक्षा पहुंचाना है। इसी योजना के तहत दिए जाने वाले चावल में कुछ साल पहले पोषक तत्व मिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, ताकि लोगों को आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन जैसे जरूरी तत्व भी मिल सकें।
क्यों रोकी गई फोर्टिफिकेशन की प्रक्रिया
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक सरकार ने बताया कि लंबे समय तक गोदामों में चावल रखे रहने से उसमें मिलाए गए पोषक तत्वों की मात्रा कम हो रही थी। यानी जिस मकसद से चावल को फोर्टिफाइड बनाया गया था, वह पूरी तरह पूरा नहीं हो पा रहा था। इसलिए एहतियात के तौर पर इस प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। यह फैसला IIT Kharagpur की एक रिपोर्ट के बाद लिया गया। सरकार ने इस संस्थान को यह जिम्मेदारी दी थी कि वह अलग-अलग मौसम और हालात में रखे गए फोर्टिफाइड चावल की गुणवत्ता की जांच करे।
आईआईटी खड़गपुर की रिपोर्ट में क्या सामने आया
रिपोर्ट में पाया गया कि चावल को जहां रखा जाता है, वहां का तापमान, हवा में नमी (उमस), गोदाम की स्थिति और पैकिंग का तरीका, ये सभी चीजें चावल की गुणवत्ता पर बड़ा असर डालती हैं। अगर चावल लंबे समय तक गोदाम में रखा रहता है या उसे बार-बार एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है, तो उसमें मिलाए गए पोषक तत्व धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि फोर्टिफाइड चावल जल्दी खराब होने लगता है और उसकी गुणवत्ता उतने समय तक नहीं टिकती, जितनी उम्मीद की गई थी। इससे लोगों को वह पूरा पोषण नहीं मिल पा रहा था, जिसके लिए यह खास चावल तैयार किया गया था।
दो से तीन साल तक गोदाम में रहता है चावल
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राशन के लिए खरीदा गया चावल अक्सर दो से तीन साल तक सरकारी गोदामों में पड़ा रहता है। देश में हर साल सरकारी योजनाओं के लिए करीब 372 लाख टन चावल की जरूरत होती है। वहीं, सरकारी भंडार में करीब 674 लाख टन चावल उपलब्ध रहने का अनुमान है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 की खरीफ फसल भी शामिल है। इतनी बड़ी मात्रा में चावल को लंबे समय तक सुरक्षित रखना अपने आप में एक चुनौती है। ऐसे में फोर्टिफाइड चावल की गुणवत्ता बनाए रखना और भी मुश्किल हो जाता है।
खाद्य मंत्रालय का क्या कहना है
खाद्य मंत्रालय ने अपने बयान में साफ किया है कि मौजूदा नतीजों को देखते हुए चावल में पोषक तत्व मिलाने का काम फिलहाल रोक दिया गया है। यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक पोषक तत्व लोगों तक पहुंचाने का कोई ज्यादा मजबूत और बेहतर तरीका तैयार नहीं हो जाता। मंत्रालय का कहना है कि सरकार इस दिशा में नए विकल्पों और बेहतर तकनीक पर काम करेगी, ताकि लोगों को सही मात्रा में पोषण मिल सके और चावल की गुणवत्ता भी बनी रहे।
राशन की मात्रा पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस फैसले का राशन की मात्रा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लोगों को जितना अनाज पहले मिल रहा था, उतना ही मिलता रहेगा। सरकारी राशन की दुकानों, आंगनवाड़ी सेवाओं और स्कूलों में मिलने वाले मध्याह्न भोजन पर भी इसका कोई असर नहीं होगा। यानी आम लोगों को अनाज मिलने में कोई कमी नहीं आएगी। सिर्फ चावल में पोषक तत्व मिलाने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोका गया है।
आगे क्या हो सकता है
सरकार अब ऐसे विकल्पों की तलाश में है, जिनसे पोषक तत्व लोगों तक बेहतर तरीके से और सुरक्षित रूप में पहुंचाए जा सकें। संभव है कि भविष्य में नई तकनीक, बेहतर पैकेजिंग या अलग वितरण व्यवस्था के जरिए इस समस्या का समाधान निकाला जाए। फिलहाल, सरकार का कहना है कि गुणवत्ता और पोषण दोनों को ध्यान में रखते हुए ही अगला कदम उठाया जाएगा। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि लोगों को सुरक्षित और सही गुणवत्ता वाला अनाज मिल सके, भले ही उसके लिए कुछ समय तक फोर्टिफिकेशन रोकना पड़े।
