India Wealth Inequality : पूरी दुनिया में अमीर और गरीबों के बीच दौलत के बंटवारे की खाई तेजी से बढ़ रही है। संपत्ति का ऐसा ध्रुवीकरण हो रहा है कि अमीरों की दौलत "दिन दो गुनी रात चौगुनी" अंदाज में बढ़ रही है। वहीं, गरीबों की दौलत "कंगाली में आटा गीला" जैसी होती जा रही है। World Inequality Labs की तरफ से पेश की गई 2026 की रिपोर्ट के आधार पर जेरोधा के वैरसिटी प्लेटफॉर्म पर एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अमीरों और गरीबों के बीच संपत्ति की बढ़ती खाई के चलते क्यों बार-बार अमीरों पर ज्यादा टैक्स लगाने की मांग हो रही है।
अमीर हो रहे और अमीर
क्या कहते हैं आंकड़े?
वैरसिटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे वैश्विक स्तर पर भी टॉप 10% लोग दुनिया की 75% संपत्ति नियंत्रित करते हैं, जबकि नीचे की आधी आबादी के हिस्से में सिर्फ 2% वेल्थ आती है। आय के मामले में भी नीचे के 50% लोगों को सिर्फ 8% हिस्सा मिलता है। वहीं, भारत के मामले में आंकड़े हैरान करने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के सबसे अमीर 1% लोगों के पास देश की कुल संपत्ति का करीब 40% हिस्सा है। दूसरी तरफ देश की नीचे की 50% आबादी के पास सिर्फ 6% संपत्ति बची है।
विकास दर से ज्यादा पूंजी पर रिटर्न
रिपोर्ट में अर्थशास्त्री थॉमस पिकेटी के हवाले से बताया गया है कि जिन लोगों के पास पहले से शेयर, बिजनेस, जमीन और निवेश हैं, उनकी संपत्ति अर्थव्यवस्था की ग्रोथ से ज्यादा तेजी से बढ़ती है। इसी को उन्होंने “r > g” सिद्धांत के तौर पर समझाया है। r>g यानी पूंजी पर मिलने वाला रिटर्न आर्थिक विकास दर से ज्यादा होता है। इससे अमीर समय के साथ और ज्यादा अमीर होते जाते हैं।
अमीरों के हित में टैक्स ढांचा
रिपोर्ट में बताया गया है क 1990 के दशक के बाद से अरबपतियों और बेहद अमीर लोगों की संपत्ति औसतन 8% सालाना की दर से बढ़ी, जो नीचे की आधी आबादी की संपत्ति वृद्धि से लगभग दोगुनी है। रिपोर्ट में कई अर्थशास्त्रियों के हवाले से बताया गया है कि सुपर-रिच लोग टैक्स प्लानिंग, होल्डिंग कंपनियों और निवेश संरचनाओं के जरिए प्रभावी टैक्स दर काफी कम कर लेते हैं। इसी वजह से दुनिया भर में “wealth tax” और “inheritance tax” जैसी बहस फिर तेज हो रही है।
कैसे हल होगी समस्या
रिपोर्ट में असमानता की बढ़ती रफ्तार पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि सरकारों को संतुलन बनाने के लिए अमीरों पर ज्यादा कर लगाने के बारे में सोचना चाहिए। इसमें थॉमस पिकेटी और गैब्रियल जुकमैन जैसे अर्थशास्त्रियों के विचारों के आधार पर बताया गया है कि कैसे वॉरेन बफेट जैसे सुपर रिच मिडिल क्लास से भी कम टैक्स चुकाते हैं। इसके साथ ही कहा गया है कि वेल्थ टैक्स के खिलाफ दिए जाने वाले तर्क कोबढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाते हैं। इस असंतुलन को दूर करने के लिए वैल्थ टैक्स जरूरी है।
