India Rich List 2026 : भारत में अमीर लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। देश में अब ऐसे लोगों की संख्या 3,040 हो गई है, जिनके पास कम से कम 425 करोड़ रुपये की संपत्ति है। इन अमीर लोगों की कुल संपत्ति मिलाकर करीब 104 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई है। हालांकि देश की कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा अभी भी कुछ चुनिंदा परिवारों के पास ही केंद्रित है। 360 ONE Wealth Creators List 2026 और Crisil Intelligence की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अमीरों की लिस्ट में कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। रिपोर्ट बताती है कि अब पहली पीढ़ी के उद्यमी (First Generation Entrepreneurs) पुराने कारोबारी परिवारों से आगे निकल रहे हैं।
भारत में तेजी से बढ़ रही हैं अमीरों की संख्या और संपत्ति (तस्वीर-Canva)
पहली बार सेल्फ-मेड उद्यमियों की संख्या ज्यादा
रिपोर्ट के मुताबिक, इस लिस्ट (India Wealth Creators List) में 1,696 पहली पीढ़ी के उद्यमी शामिल हैं, जबकि पुराने कारोबारी घरानों के मालिकों, उत्तराधिकारियों और परिवारों की संख्या 1,290 है। यह बदलाव भारत की अर्थव्यवस्था में नई सोच और नए कारोबारों के बढ़ते प्रभाव को दिखाता है। पहले देश की बड़ी संपत्ति ज्यादातर पारंपरिक कारोबारी परिवारों के पास थी, लेकिन अब स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी और नए सेक्टर से जुड़े संस्थापक तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। क्रिसिल इंटेलिजेंस की प्रेसिडेंट और बिजनेस हेड प्रीति अरोड़ा के अनुसार, भारत लंबे समय तक पारिवारिक कारोबारी घरानों के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन पहली पीढ़ी के संस्थापकों की बढ़ती संख्या एक बड़ा बदलाव है।
अंबानी परिवार के वारिस टॉप पर
रिपोर्ट के अनुसार अमीरों की लिस्ट में Anant Ambani, Isha Ambani और Akash Ambani टॉप तीन स्थानों पर बने हुए हैं। तीनों की व्यक्तिगत संपत्ति 2.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। हालांकि बड़े औद्योगिक समूह अभी भी भारत की कुल संपत्ति में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं। करीब 30 बड़े कारोबारी लोग अकेले कुल संपत्ति का 14.6 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करते हैं। इनकी औसत संपत्ति करीब 50,000 करोड़ रुपये प्रति व्यक्ति है।
महिलाओं की बढ़ी भागीदारी
भारत की अमीर लिस्ट में महिलाओं की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस लिस्ट में 738 महिलाएं शामिल हैं, जिनके पास कुल संपत्ति का 22.6 प्रतिशत हिस्सा है। खास बात यह है कि इनमें 51 महिलाएं 40 साल से कम उम्र की हैं। इन युवा महिला उद्यमियों की औसत संपत्ति करीब 6,542 करोड़ रुपये है। यह भारत में महिला कारोबारियों और निवेशकों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
कुछ परिवारों के पास अब भी बड़ी संपत्ति
भले ही नए उद्यमियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन भारत में संपत्ति का बड़ा हिस्सा अभी भी कुछ बड़े परिवारों के पास केंद्रित है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के टॉप 100 परिवारों के पास 76.5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। वहीं सिर्फ टॉप 10 परिवारों के पास कुल संपत्ति का करीब 49 प्रतिशत हिस्सा है। सबसे अमीर कारोबारी परिवारों में Gautam Adani और परिवार पहले स्थान पर हैं, जिनकी संपत्ति 9,08,178 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके बाद Mukesh Ambani और परिवार 8,93,622 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर हैं। तीसरे स्थान पर Sunil Bharti Mittal और परिवार हैं, जिनकी संपत्ति 4,96,687 करोड़ रुपये है।
पारंपरिक सेक्टरों का दबदबा बरकरार
भारत के अमीरों की संपत्ति में फार्मास्यूटिकल्स, वित्तीय सेवाएं, निर्माण मशीनरी और इंजीनियरिंग जैसे पारंपरिक क्षेत्रों का दबदबा बना हुआ है। इन सेक्टरों का कुल संपत्ति में करीब 83 प्रतिशत योगदान है। हालांकि नए जमाने के कारोबार भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। एयरोस्पेस और डिफेंस, फिनटेक और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर अब कुल संपत्ति में 15.5 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्रीन एनर्जी और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को सरकार की नीतियों से फायदा मिल रहा है। कई बड़े कारोबारी अपनी संपत्ति को नए स्टार्टअप और शुरुआती चरण के कारोबारों में निवेश कर रहे हैं।
मुंबई बनी भारत की दौलत की राजधानी
भारत के अमीर लोगों के लिए मुंबई सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में 802 वेल्थ क्रिएटर्स रहते हैं, जिनके पास लिस्ट की कुल संपत्ति का 38.4 प्रतिशत हिस्सा है। मुंबई के बाद अहमदाबाद दूसरे स्थान पर है, जहां बड़े औद्योगिक समूह और फार्मा कंपनियों की मजबूत मौजूदगी है। वहीं बेंगलुरु तीसरे स्थान पर है, जहां टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग कंपनियों का प्रभाव है। नई दिल्ली और गुरुग्राम भी देश के टॉप 5 अमीर शहरों में शामिल हैं। इन 5 शहरों में ही लिस्ट में शामिल कुल संपत्ति का 70.2 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है। कुल मिलाकर, भारत में अमीरों की संख्या और संपत्ति दोनों बढ़ रही हैं। जहां एक ओर पुराने कारोबारी परिवारों का दबदबा कायम है, वहीं दूसरी ओर नए उद्यमी और महिला कारोबारी देश की नई आर्थिक ताकत बनकर उभर रहे हैं।
