भारत का रियल एस्टेट क्षेत्र बढ़ती लागत के दबाव और सख्त नियामकीय अनुपालन के बीच मूल्य श्रृंखला में दक्षता बढ़ाने के लिए तेजी से डिजिटल और डेटा-आधारित माध्यमों (टूल) को अपना रहा है। उद्योग मंडल फिक्की और केपीएमजी की एक संयुक्त रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का रियल एस्टेट बाजार 2047 तक 5,800 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा जो 2025 में 650 अरब डॉलर का था।
रियल स्टेट सेक्टर तेजी से नई तकनीक को अडॉप्ट कर रहा है। (फोटो क्रेडिट-iStock)
फिक्की और परामर्श कंपनी केपीएमजी की रिपोर्ट ’भारत के रियल एस्टेट परिदृश्य की पुनर्कल्पना - मूल्य श्रृंखला परिवर्तन में प्रौद्योगिकी की भूमिका’ बृहस्पतिवार को यहां जारी की गई। फिक्की द्वारा आयोजित एक रियल एस्टेट शिखर सम्मेलन में जारी रिपोर्ट में कहा गया, ’’. यह क्षेत्र अब मूल्य श्रृंखला में तेजी से डिजिटल और डेटा-आधारित माध्यमों को अपना रहा है।’’
बदलाव के दौर में रियल स्टेट सेक्टर
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का रियल एस्टेट सेक्टर अब बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। परियोजनाओं की योजना बनाने, उन्हें पूरा करने, बेचने और संभालने के तरीकों में बदलाव आ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तकनीक अब रियल एस्टेट के हर काम का अहम हिस्सा बनती जा रही है। इसमें जगह चुनने, डिजाइन तैयार करने, निर्माण करने, बिक्री और संपत्ति के प्रबंधन तक सभी काम शामिल हैं।
फिक्की और केपीएमजी ने इस क्षेत्र में प्रौद्योगिकी की स्वीकार्यता बढ़ाने के प्रमुख कारकों को सूचीबद्ध किया है। इसमें लागत दक्षता की अनिवार्यता, बढ़ी हुई नियामकीय और अनुपालन अपेक्षाएं, संस्थागत पूंजी की बढ़ती भागीदारी और अधिक जागरूक और सक्रिय घर के खरीदार शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये बदलाव बिल्डरों को पुराने मैन्युअल और धीमे तरीकों को छोड़कर आधुनिक डिजिटल तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। दूसरे स्रोतों के आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का रियल एस्टेट बाजार, जिसकी कीमत 2025 में करीब 650 अरब डॉलर थी, 2047 तक बढ़कर 5,800 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि रीट (रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट) और इनविट (इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट) के माध्यम से 16 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि जुटाई गई है। यह दर्शाता है कि बाजार अब संस्थागत रूप से प्रबंधित, पारदर्शी मंचों की ओर निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है।
(इनपुट: भाषा)
