Rafale Jets Procurement: भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड (डीपीबी) ने शुक्रवार (16 जनवरी) को फ्रांसीसी विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट से 114 राफेल लड़ाकू जेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब यह प्रस्ताव अगली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) की बैठक में पेश किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इसके बाद इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से अंतिम मंजूरी मिलने की संभावना है।
डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने 114 राफेल जेट खरीदने के प्रस्ताव को दी मंजूरी (तस्वीर-istock)
भारतीय वायु सेना की मांग और प्रस्ताव
पिछले साल, भारतीय वायु सेना ने रक्षा मंत्रालय को 114 और राफेल लड़ाकू जेट खरीदने के लिए औपचारिक प्रस्ताव भेजा था। न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने सूत्रों के अनुसार लिखा कि भारत और फ्रांस अगले महीने इस प्रस्ताव पर अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यह समझौता अंतर-सरकारी होगा, जिससे विमानों की आपूर्ति सीधे फ्रांस से भारत को होगी और कोई मध्यस्थ शामिल नहीं होगा।
पहले से चल रहे राफेल खरीद समझौते
इससे पहले अप्रैल में भारत ने भारतीय नौसेना के लिए फ्रांस से 26 राफेल-मरीन लड़ाकू जेट खरीदने का समझौता किया था। यह समझौता 63,000 करोड़ रुपए का था और इसे ऐतिहासिक माना जा रहा है। इसमें 22 सिंगल-सीटर जेट और 4 टू-सीटर प्रशिक्षण विमान शामिल हैं। इन विमानों की आपूर्ति 2031 तक पूरी होने की उम्मीद है।
भारत में राफेल के उत्पादन की तैयारी
राफेल जेट के निर्माण को लेकर भारत ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। जून में डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड ने भारत में राफेल लड़ाकू विमान के धड़ (फ्यूजलेज) के निर्माण के लिए चार उत्पादन हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य भारत की एयरोस्पेस विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना और वैश्विक आपूर्ति सीरीज में योगदान देना है।
उत्पादन प्रक्रिया और समयरेखा
पहले धड़ के हिस्से वित्त वर्ष 2028 में असेंबली लाइन से निकलने की उम्मीद है। उत्पादन प्लांट से प्रति माह दो पूर्ण धड़ तक की आपूर्ति होने की संभावना है। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स हैदराबाद में राफेल के प्रमुख संरचनात्मक भागों के निर्माण के लिए अत्याधुनिक संयंत्र स्थापित करेगा। इसमें पिछला धड़, केंद्रीय धड़, अगला धड़ और पिछली पार्श्व आवरण शामिल हैं।
भारत की रक्षा और आत्मनिर्भरता
इस समझौते से भारत की रक्षा शक्ति और आधुनिक तकनीक दोनों में वृद्धि होगी। सीधे फ्रांस से विमानों की खरीद और भारत में धड़ के निर्माण से न केवल भारतीय वायु सेना को ताकत मिलेगी, बल्कि देश की एयरोस्पेस उद्योग में नई क्षमताएं भी विकसित होंगी। यह कदम भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और ग्लोबल डिफेंस सप्लाई चेन में भागीदारी को भी मजबूत करेगा।
भारत की 114 राफेल जेट की योजना न केवल देश की रक्षा को सशक्त बनाएगी, बल्कि भारतीय उद्योग को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। यह कदम भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगा और भविष्य में भारतीय एयरोस्पेस उद्योग को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में मदद करेगा।
