रूस से सस्ता तेल जमकर खरीद रहा भारत, 3 साल का रिकॉर्ड टूटा, जानें क्या है सरकार का मास्टरप्लान?

ईरान संकट और होर्मुज रूट बंद होने के बीच भारत ने रूस से तेल खरीद तेजी से बढ़ाया है। भारत अपनी एनर्जी जरूरत को सुरक्षित करने के लिए यह कदम उठाया है।

Iran crisis: अमेरिका-ईरान युद्ध और होर्मुज रूट बंद होने का व्यापक असर भारत के तेल और गैस सप्लाई पर हुआ है। इस संकट से सबक लेते हुए भारत ने अपने रिजर्व को बढ़ाना शुरू कर दिया है। भारत बड़े पैमाने पर रूसी कच्चा तेल खरीद रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस से कच्चे तेल का आयात 3 साल के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया है। गौरतलब है कि रोसनेफ़्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद कम कर दी थी, लेकिन मध्य-पूर्व से आपूर्ति अनिश्चित होने के कारण, उसने फिर से जोर-शोर से रूसी तेल खरीदना शुरू कर दिया है।

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रूस से कच्चे तेल का आयात

भारतीय रिफाइनरों ने पिछले दो महीनों में रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है, और उन्हें उम्मीद है कि डोनल्ड ट्रम्प प्रशासन द्वारा संभावित प्रतिबंधों को लेकर चिंताएं कम होने के चलते, साल के बाकी समय में भी यह खरीद ऊंचे स्तर पर बनी रहेगी। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, पहले रूस से अपने कच्चे तेल का बहुत छोटा हिस्सा ही खरीदता था। 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह स्थिति नाटकीय रूप से बदल गई; जब अन्य देशों ने रूस से दूरी बना ली, तब भारत ने भारी छूट का लाभ उठाते हुए समुद्री मार्ग से तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देश के रूप में अपनी जगह बनाई।

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