Income Tax Raid: आयकर विभाग कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के 10 ठिकानों पर 6 दिसंबर को छापेमारी की थी। जहां से अब तक कुल 354 करोड़ रुपए मिले हैं। ऐसे में आपके भी मन में सवाल उठा होगा कि इनकम टैक्स, ED और CBI जैसी एजेंसियां जो पैसे जब्त करती हैं, उसका क्या करती हैं? उसे कहां और किसकी निगरानी में रखा जाता है और जब्त की गई रकम वापस मिलती है या नहीं। मिलती भी है तो कैसे मिलती है? इन सभी सवालों के बारे में जानते हैं।
इनकम टैक्स, ED और CBI जैसी एजेंसियां जो पैसे जब्त करती हैं, उसका क्या करती हैं
कैश का क्या होता है?
पहले पैसे या कैश के पंचनामे में कुल कितने पैसे बरामद हुए, कितनी गड्डियां हैं, कितने 100, 200, 500 और अन्य नोट हैं इस बात का जिक्र होता है। जब्त किए गए कैश में अगर नोट पर किसी तरह के निशान होते है या कुछ लिखा होता तो उसे जांच एजेंसी अपने पास जमा कर लेती है और इसे कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश करती है। बाकी पैसों रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में केंद्र सरकार के खाते में जमा करा देती हैं। कई बार जांच एजेंसी इंटरनल ऑर्डर से केस की सुनवाई पूरी होने तक अपने पास पैसा जमा रखती है।
प्रॉपर्टी का क्या होता है?
आयकर विभाग को बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन (प्रोहिबिटेशन) एक्ट और आयकर एक्ट के तहत संपत्ति को अटैच करने का अधिकार है। अदालत में संपत्ति की जब्ती साबित होने पर इस संपत्ति को सरकार कब्जे में ले लेती है। आयकर विभाग किसी की प्रॉपर्टी को अटैच करती है, तो उस पर बोर्ड लगा दिया जाता है, जिस पर लिखा होता है इस संपत्ति की खरीद-बिक्री या इसका इस्तेमाल नहीं हो सकता है। हालांकि कई मामलों में घर और कॉमर्शियल प्रॉपर्टी को अटैच किए जाने पर उनके इस्तेमाल को लेकर छूट भी है।
कोर्ट के फैसले के बाद मिलते हैं जब्त हुए पैसे
कैश, गहने या प्रॉपर्टी, जब्त किए गए सामान पर आखिरी फैसला कोर्ट करती है। मुकदमा शुरू होने पर जब्त किए गए सामान को सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश किया जाता है। अगर अदालत जब्ती का आदेश देती है तो पूरी संपत्ति पर सरकार का कब्जा हो जाता है। अगर आयकर विभाग कोर्ट में जब्ती की कार्रवाई को सही नहीं साबित कर पाता है तो संपत्ति संबंधित व्यक्ति को लौटा दी जाती है।
