Wealth Creator SIP : शेयर बाजार में निवेश करने वालों के सामने सबसे बड़ा सवाल अक्सर यही रहता है कि बाजार में एंट्री कब की जाए। जब बाजार रिकॉर्ड हाई पर होता है तो डर रहता है कि कहीं निवेश के तुरंत बाद गिरावट न आ जाए। लेकिन, एक लंबी अवधि का SIP उदाहरण दिखाता है कि सही समय पकड़ने से ज्यादा अहम लगातार निवेश करते रहना हो सकता है।
SIP पर 18 साल में मिला शानदार रिटर्न
म्यूचुअल फंड निवेश पर डेटा और नंबर की अपनी गहन जांच-पड़ताल के लिए जाने जाने वाले CFP, Mid & Small Cap Specialist और AMFI Registered MFD B Padmanaban ने 2008 के बाजार शिखर से शुरू SIP का एक इस्लस्ट्रेशन साझा किया है। इसमें दिखाया गया है कि अगर किसी निवेशक ने बाजार के पीक के आसपास ₹10,000 की मासिक SIP शुरू की और लंबे समय तक जारी रखा, तो मार्केट क्रैश और वालैटिलिटी के बावजूद रकम कई गुना बढ़ सकती है। पद्मनाभन ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट्स में लंबे समय तक निवेश, अनुशासन और कंपाउंडिंग की अहमियत पर जोर देते रहे हैं।
2008 के पीक शुरू हुई SIP
8 जनवरी, 2008 को Sensex करीब 20,873 पर बंद हुआ था। इसके बाद वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई और 9 मार्च 2009 को Sensex 8,160 तक फिसल गया। यानी पीक से करीब 60 फीसदी की गिरावट आई। ऐसे माहौल में ज्यादातर निवेशक घबरा सकते थे। लेकिन SIP का मॉडल अलग तरीके से काम करता है। निवेशक एकमुश्त बड़ी रकम बाजार में लगाने के बजाय हर महीने एक तय रकम निवेश करता रहता है। बाजार गिरने पर उसी ₹10,000 से ज्यादा यूनिट खरीदी जाती हैं और बाजार चढ़ने पर कम यूनिट मिलती हैं।
करोड़ों में पहुंचा ₹22.50 लाख का निवेश
पद्मनाभन ने 8 जनवरी, 2008 से 18 सितंबर, 2026 तक के आंकड़ों के हिसाब से ₹10,000 की मासिक SIP को आधार मानते हुए बताया है कि कैसे इस दौरान कुल 225 किस्त जमा हुईं और निवेश की कुल रकम ₹22.50 लाख रही। इसमें अलग-अलग इक्विटी म्यूचुअल फंड कैटेगरी और स्कीम्स के नतीजे काफी अलग दिखाई देते हैं। HDFC Flexi Cap Fund में यह निवेश करीब ₹1.15 करोड़ तक पहुंचा। यानी ₹22.50 लाख के कुल निवेश पर करीब ₹92.50 लाख की पहुंच गया। Nippon India Growth Mid Cap Fund में रकम करीब ₹1.40 करोड़ हुई। यहां कुल निवेश के मुकाबले करीब ₹1.17 करोड़ का अंतर बनता है। HDFC Mid Cap Fund में निवेश का मूल्य लगभग ₹1.79 करोड़ तक पहुंचा। यानी ₹22.50 लाख की कुल SIP के मुकाबले करीब ₹1.56 करोड़ ज्यादा। वहीं DSP Small Cap Fund के मामले में रकम ₹2 करोड़ के पार, करीब ₹2.01 करोड़ तक पहुंच गई। यानी कुल निवेश से करीब ₹1.79 करोड़ ज्यादा। इन आंकड़ों में SIP के एनुअलाइज्ड रिटर्न क्रमशः करीब 15.47%, 17.2%, 19.33% और 20.35% बताए गए हैं।
आखिर SIP में इतना बड़ा फर्क कैसे बनता है?
सबसे पहला कारण है कंपाउंडिंग। शुरुआत में निवेश पर मिलने वाला रिटर्न छोटा दिख सकता है, लेकिन लंबे समय में उसी रिटर्न पर भी रिटर्न मिलने लगता है। समय जितना लंबा होता है, कंपाउंडिंग का असर उतना बड़ा हो सकता है। दूसरा फायदा रुपी कॉस्ट एवरेजिंग (Rupee-Cost Averaging) का होता है। जब बाजार नीचे होता है, तब ₹10,000 की SIP में पहले की तुलना में ज्यादा यूनिट आती हैं। बाद में बाजार में रिकवरी आती है, तो यही अतिरिक्त यूनिट पोर्टफोलियो के वैल्यू क्रिएशन में योगदान कर सकती हैं। इसी वजह से SIP निवेशक को हर बार यह फैसला लेने की जरूरत नहीं पड़ती कि बाजार अभी सस्ता है या महंगा।
पीक पर SIP का डर क्यों कम हो सकता है?
एकमुश्त निवेश और SIP में यहां बड़ा अंतर है। अगर कोई निवेशक ठीक मार्केट पीक पर पूरी रकम लगा दे, तो शुरुआती गिरावट का असर काफी बड़ा हो सकता है। लेकिन SIP में पूरी रकम एक दिन में निवेश नहीं होती। पद्मनाभन के मुताबिक एकमुश्त निवेश में मार्केट लेवल का महत्व काफी ज्यादा होता है, जबकि SIP में एंट्री लेवल का असर तुलनात्मक रूप से कम हो सकता है, क्योंकि निवेश अलग-अलग समय और अलग-अलग कीमतों पर होता है। यही वजह है कि SIP को मार्केट टाइमिंग की जगह इन्वेस्टमेंट डिसिप्लेन से जोड़कर देखा जाता है।
Disclaimer: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। इस लेख में दिए गए आंकड़े और निवेश से जुड़े विचार B Padmanaban के बताए गए Analysis/Illustration पर आधारित हैं। यह किसी खास Mutual Fund Scheme या निवेश को खरीदने-बेचने की सलाह नहीं है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
