Hidden Property Buying Costs: घर खरीदना हर व्यक्ति के जीवन के सबसे बड़े वित्तीय फैसलों में से एक होता है। अक्सर लोग घर की कीमत, डाउन पेमेंट और होम लोन की ईएमआई पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन एक बड़ी गलती स्टाम्प ड्यूटी (Stamp Duty Charges) और रजिस्ट्रेशन शुल्क जैसे अतिरिक्त खर्चों को अपने बजट में शामिल न करने की करते हैं। यही वजह है कि कई बार घर खरीदने की कुल लागत अनुमान से काफी अधिक हो जाती है।
प्रॉपर्टी बाईंग के हिडन चार्जेस (Photo: iStock)
क्या होती है स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस?
स्टाम्प ड्यूटी एक सरकारी टैक्स है, जिसे संपत्ति खरीदने पर राज्य सरकार को देना पड़ता है। यह भुगतान कानूनी रूप से संपत्ति का मालिकाना हक प्राप्त करने के लिए अनिवार्य होता है। वहीं रजिस्ट्रेशन फीस वह शुल्क है, जो संपत्ति को खरीदार के नाम पर आधिकारिक रूप से दर्ज कराने के लिए चुकाया जाता है। अगर ये शुल्क नहीं चुकाए जाते, तो संपत्ति का स्वामित्व कानूनी रूप से मान्य नहीं माना जाता।
बजट पर पड़ सकता है बड़ा असर
कई लोग घर की कीमत के हिसाब से अपना पूरा बजट तैयार कर लेते हैं, लेकिन स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क को नजरअंदाज कर देते हैं। जानाकारों की मानें तो ये शुल्क कई राज्यों में प्रॉपर्टी की कीमत का लगभग 5% से 8% या उससे भी अधिक हो सकते हैं। ऐसे में 50 लाख रुपये की संपत्ति पर भी लाखों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं।
होम लोन से नहीं मिलता इन खर्चों का कवर
एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अधिकांश मामलों में होम लोन (Home Loan) केवल संपत्ति की कीमत को कवर करता है। स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क के लिए अलग से व्यवस्था करनी पड़ती है। यानी अगर आपने घर खरीदने के लिए केवल डाउन पेमेंट और ईएमआई का ही हिसाब लगाया है, तो अंतिम समय में अतिरिक्त पैसों की जरूरत पड़ सकती है।
घर खरीदने से पहले क्या करें?
घर खरीदते समय केवल उसकी कीमत देखकर बजट तय करना सही नहीं होता। स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस, कानूनी और दस्तावेजी खर्च जैसे अतिरिक्त शुल्कों को भी पहले से ध्यान में रखना चाहिए। ऐसा करने से आपको घर खरीदने की कुल लागत का सही अंदाजा लग जाता है और बाद में पैसों की कमी जैसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। बेहतर बजट योजना बनाने से अनचाहे खर्चों के झटके से बचा जा सकता है और घर खरीदने का पूरा अनुभव अधिक आसान और तनावमुक्त बन जाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खरीदारों को कुल बजट में कम से कम 10% अतिरिक्त राशि का प्रावधान रखना चाहिए, ताकि स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और अन्य अप्रत्याशित खर्चों का सामना आसानी से किया जा सके।
