म्यूचुअल फंड में निवेश इन दिनों तेजी से बढ़ रहा है, इसमें निवेश कर अमीर बनने के लिए कई रूल हैं उसी में से एक रूल है Rule Of 60. देखने या सुनने में यह भले ही किसी सरकारी योजना की तरह लगे, लेकिन असल में यह एक बेहद आसान वित्तीय कैलकुलेशन है। यह गणित समझाता है कि अगर आप 30 साल की उम्र में एक छोटी सी SIP से शुरुआत करते हैं, तो 60 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते आपके पास करोड़ों रुपये का विशाल फंड तैयार हो सकता है।
'Rule of 60' जो बना देगा करोड़पति!
इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें आपको शुरुआत से ही हर महीने कोई बहुत बड़ी रकम निवेश करने की जरूरत नहीं पड़ती। आपको बस एक तय फॉर्मूले के मुताबिक हर साल अपने निवेश में एक मामूली सी बढ़ोतरी (Step-up) करते जाना है, और बाकी का बड़ा कमाल 'कंपाउंडिंग की ताकत' खुद-ब-खुद कर देती है।
क्या है रूल ऑफ़ 60?
'Rule of 60' वित्तीय योजना (Financial Planning) का एक ऐसा पावरफुल सिद्धांत है, जो आपकी उम्र और 60 वर्ष की रिटायरमेंट आयु के बीच के समय का लाभ उठाकर आपको करोड़पति बनाने में मदद करता है। यह फॉर्मूला पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप 60 साल की उम्र तक पहुंचने से पहले कितनी जल्दी निवेश शुरू करते हैं। आप जितनी छोटी उम्र में निवेश शुरू करेंगे, 60 वर्ष की आयु तक करोड़ों रुपये का कॉर्पस (फंड) तैयार करना आपके लिए उतना ही आसान और सस्ता होगा।
'कंपाउंडिंग की ताकत' का कमाल
'Rule of 60' की असली ताकत कंपाउंडिंग में छिपी है, जिसे दुनिया का आठवां अजूबा भी कहा जाता है। जब आप म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP के जरिए हर महीने एक निश्चित राशि लगाते हैं, तो आपको सिर्फ आपके मूलधन (Principal Amount) पर ही रिटर्न नहीं मिलता, बल्कि मिले हुए रिटर्न पर भी रिटर्न मिलने लगता है। लंबे समय में यह चक्र आपके छोटे-छोटे मासिक निवेश को एक विशालकाय फंड में बदल देता है।
'Rule of 60' कैसे करता है काम?
मान लीजिए कि आपका लक्ष्य 60 साल की उम्र में 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक का फंड बनाना है। अगर आप 20 से 25 साल की उम्र में निवेश शुरू कर देते हैं, तो आपके पास 60 की उम्र तक पहुंचने के लिए 35 से 40 साल का लंबा समय होता है। इस स्थिति में अगर आप इक्विटी म्यूचुअल फंड में हर महीने महज ₹3,000 से ₹5,000 की SIP भी करते हैं (जिस पर औसतन 12% से 15% का सालाना रिटर्न मिले), तो 60 वर्ष की आयु तक आप आसानी से 1 से 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड जमा कर लेंगे।
देरी करने पर क्या होता है नुकसान?
'Rule of 60' यह भी चेतावनी देता है कि आप निवेश शुरू करने में जितनी देरी करेंगे, आपका लक्ष्य उतना ही मुश्किल होता जाएगा। मान लीजिए आप 25 साल की उम्र के बजाय 40 साल की उम्र में निवेश शुरू करते हैं, तो 60 साल की उम्र तक आपके पास केवल 20 साल का समय बचेगा। अब उसी 1 करोड़ रुपये के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आपको हर महीने ₹3,000 की जगह करीब ₹10,000 से ₹12,000 या उससे भी ज्यादा की एसआईपी करनी पड़ेगी। यानी समय कम होने पर आपकी जेब पर बोझ कई गुना बढ़ जाता है।
अमीर बनने की तेज रफ्तार
यदि आप शुरुआत में ज्यादा पैसा नहीं बचा पा रहे हैं, तो 'Rule of 60' के साथ Step-up SIP का तरीका अपना सकते हैं। इसका मतलब है कि आप हर साल अपनी आमदनी या सैलरी बढ़ने के साथ-साथ अपनी SIP की रकम में भी 5% या 10% का इजाफा करते रहें। उदाहरण के लिए, अगर आप इस साल ₹5,000 की SIP कर रहे हैं, तो अगले साल इसे बढ़ाकर ₹5,500 कर दें। यह छोटा सा बदलाव 60 साल की उम्र तक आपके कुल फंड को दोगुना से भी ज्यादा बढ़ा सकता है।
इन बातों का रखें ध्यान
अनुशासन (Discipline): बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराकर अपनी SIP को बीच में कभी बंद न करें। मंदी के समय आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, जो तेजी आने पर बड़ा फायदा देती हैं।
इक्विटी फंड्स का चुनाव: लंबे समय (15-30 साल) के लिए डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड्स, फ्लेक्सी कैप या इंडेक्स फंड्स बेहतरीन विकल्प माने जाते हैं।
इमरजेंसी फंड अलग रखें: अपने नियमित खर्चों और आपातकालीन जरूरतों के लिए अलग फंड रखें ताकि आपको अपनी एसआईपी बीच में भुनानी (Redeem) न पड़े।
