पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए प्रॉपर्टी खरीदना कितना सुरक्षित, जानें क्या कहता है कानून?

Power of Attorney Law :सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) या बेचने का समझौता प्रॉपर्टी का मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं कर सकता।

Power of Attorney Law : भारत में प्रॉपर्टी की खरीदारी में पावर ऑफ अटॉर्नी का इस्तेमाल लंबे समय से होता आ रहा है। जिन एरिया में रजिस्ट्री पर रोक होती है या किसी कारण से रजिस्ट्री नहीं हो सकती, उस एरिया में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए लोग 'पावर ऑफ अटॉर्नी' (PoA) का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, कोर्ट ने कई बार कहा है कि पावर ऑफ अटॉर्नी, रजिस्टर्ड 'सेल डीड' (बिक्रीनामा) का विकल्प नहीं है। आइए समझते हैं कि पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए प्रॉपर्टी खरीदना कितना सुरक्षित और क्या कहता है देश का कानून?

Power of Attorney

पावर ऑफ अटॉर्नी

पावर ऑफ अटॉर्नी क्या है?

पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) एक कानूनी दस्तावेज है जिसके जरिए कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को कुछ खास मामलों में अपनी तरफ से काम करने का अधिकार देता है। इसका इस्तेमाल आम तौर पर तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति विदेश में रह रहा हो, बीमारी, बढ़ती उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं या शारीरिक अक्षमता के कारण अपने मामलों को संभालने में असमर्थ हो। अधिकार देने वाले व्यक्ति को 'प्रिंसिपल' कहा जाता है, जबकि उसकी तरफ से काम करने के लिए अधिकृत व्यक्ति को 'अटॉर्नी' या 'एजेंट' कहा जाता है। PoA का इस्तेमाल कई तरह के कामों के लिए किया जा सकता है, जिनमें प्रॉपर्टी से जुड़े लेन-देन, बैंकिंग कामकाज, टैक्स फाइलिंग और अन्य वित्तीय या कानूनी मामले शामिल हैं।

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