10 मिनट डिलीवरी ही है असली कमाई का इंजन! बंद होते ही कितना डूबेगा Zepto, Blinkit, Swiggy Instamart का बिजनेस?

10 मिनट की डिलीवरी ने जेप्टो, ब्लिंकिट और स्विगी को क्विक कॉमर्स की रेस में आगे तो पहुंचाया, लेकिन अब सरकार के फैसले ने इस मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस फटाफट डिलीवरी से कंपनियां कितना कमाती हैं या क्या यही 10 मिनट की डिलीवरी ही उनकी कमाई का असली इंजन है और अब ये बंद होने पर इन कंपनियों को कितना नुकसान होगा आइए जानते हैं?

आज के समय में सब्जी से लेकर मोबाइल फोन तक, एक क्लिक पर कुछ ही मिनटों में घर तक पहुंच जाना आम बात हो गई है। मोबाइल पर ऑर्डर किया और 10 मिनट के अंदर सामान दरवाजे पर इसी सुविधा ने लोगों की किराना दुकान जाने की आदत बदल दी। भारत का क्विक कॉमर्स बाजार तेजी से बढ़ा है और अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच चुका है। साल 2024 में इस सेक्टर का कारोबार करीब 50,000 करोड़ रुपये रहा और अनुमान है कि 2030 तक यह दोगुना होकर 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। लेकिन इसी तेजी के बीच सरकार ने 10 मिनट डिलीवरी पर बड़ा फैसला लिया है। गिग वर्कर्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 10 मिनट वाली डिलीवरी के दावे पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

10 Minute delivery

क्या है क्विक कॉमर्स?

क्विक कॉमर्स का मतलब है कुछ ही मिनटों में रोजमर्रा की जरूरतों का सामान पहुंचाना। इसके लिए कंपनियों ने शहरों के भीतर छोटे-छोटे वेयरहाउस, जिन्हें डार्क स्टोर कहा जाता है, बनाए हैं। ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट जैसी कंपनियां इसी मॉडल पर काम करती हैं। भारत में यह बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। 2025 से 2030 के बीच इसकी ग्रोथ रेट करीब 15.5 फीसदी रहने का अनुमान है। साथ ही, इस सेक्टर में विदेशी निवेश भी तेजी से आया है। साल 2024 में करीब 2.8 अरब डॉलर की फंडिंग मिली, जबकि 2021 से अब तक कुल निवेश 5 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुका है। फिलहाल भारत में क्विक कॉमर्स का मार्केट साइज 5–6 अरब डॉलर है, जो हर साल 40–50 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है और 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

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