पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध को अब तीन हफ्ते से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन तनाव कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। इस वैश्विक संकट की तपिश अब दुनिया के हर देश में महसूस की जाने लगी है, जिसका सबसे ज्यादा असर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों और सप्लाई पर पड़ रहा है। भारत में वैसे तो फ़िलहाल ऐसी कोई कमी नहीं है लेकिन कई जगह ईंधन की किल्लत की खबरों के बीच कई इलाकों में 'पैनिक बाइंग' का माहौल देखा जा रहा है, जहां लोग भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए भारी मात्रा में तेल स्टॉक करने की कोशिश कर रहे हैं।
लेकिन क्या हम अपनी मर्जी के मुताबिक जितना चाहें उतना पेट्रोल या डीजल खरीद सकते हैं? क्या पेट्रोल पंप पर इसकी कोई तय सीमा है? भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद और उन्हें स्टोर करने को लेकर सख्त कानून बने हुए हैं। 'पेट्रोलियम अधिनियम 1934' के तहत तेल की खरीद और भंडारण (Storage) से जुड़े कुछ खास नियम तय किए गए हैं, जिनका उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना या कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
पेट्रोल पंप से कितनी है खरीदने की लिमिट?
अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने के लिए पेट्रोल पंप पर कोई लिमिट नहीं है। आप अपनी कार या बाइक की क्षमता के अनुसार कितना भी ईंधन भरवा सकते हैं। हालांकि, विवाद तब शुरू होता है जब लोग गाड़ियों के बजाय बोतल, जर्किन या ड्रम में तेल लेने पहुंचते हैं। सुरक्षा कारणों से पेट्रोल पंपों को खुले में या प्लास्टिक की बोतलों में पेट्रोल देने की सख्त मनाही है। अगर कोई व्यक्ति कंटेनर में तेल लेना चाहता है, तो उसे प्रमाणित मेटलिक कंटेनर का उपयोग करना होता है और इसकी अधिकतम सीमा भी 20 से 25 लीटर तक ही सीमित रखी गई है ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।
घर पर कितना पेट्रोल-डीजल रखना है कानूनी?
अगर आप घर पर इमरजेंसी के लिए पेट्रोल या डीजल स्टोर करना चाहते हैं, तो इसके लिए भी नियम काफी कड़े हैं। कानून के मुताबिक, एक व्यक्ति बिना किसी लाइसेंस के अपने पास अधिकतम 30 लीटर तक पेट्रोलियम उत्पाद रख सकता है। लेकिन यहां एक शर्त यह भी है कि इसे सुरक्षित कंटेनरों में ही रखा जाना चाहिए। यदि आप 30 लीटर से अधिक ईंधन स्टोर करना चाहते हैं, तो आपको 'पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन' (PESO) से विशेष लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है। बिना लाइसेंस के भारी मात्रा में तेल घर पर रखना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद खतरनाक है।
भंडारण के लिए सुरक्षा मानक
ईंधन स्टोर करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तनों या कंटेनरों पर भी सरकार की नजर रहती है। पेट्रोल और डीजल को कांच की बोतलों या हल्के प्लास्टिक के डिब्बों में रखना सख्त मना है क्योंकि इनसे आग लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इन्हें केवल स्टील या एल्यूमीनियम के विशेष गैलन में ही रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, जहां तेल रखा गया है, वहां वेंटिलेशन (हवा का आना-जाना) सही होना चाहिए और वह जगह किसी भी तरह के ज्वलनशील पदार्थ या बिजली के बोर्ड से दूर होनी चाहिए।
नियमों के उल्लंघन पर क्या है सजा?
पेट्रोलियम नियमों का उल्लंघन करना एक गंभीर अपराध माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति बिना लाइसेंस के तय सीमा से अधिक तेल स्टोर करता पाया जाता है, तो उस पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही, तेल को जब्त करने और संबंधित व्यक्ति को जेल भेजने का भी प्रावधान है। पेट्रोल पंप संचालकों के लिए भी निर्देश हैं कि वे संदिग्ध परिस्थितियों में खुले में तेल न बेचें, अन्यथा उनका लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।
