प्रधानमंत्री जनधन योजना को शुरू हुए लगभग एक दशक बीत चुका है और आज यह भारत की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन योजनाओं में से एक मानी जाती है। हाल ही में हैदराबाद स्थित एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (ASCI) के एक कार्यक्रम में वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने देशभर के जनधन खातों से जुड़ा एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इस समय जनधन खातों में कुल मिलाकर करीब 2.75 लाख करोड़ रुपये जमा हैं। यह आंकड़ा न सिर्फ योजना की सफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि देश की बड़ी आबादी अब औपचारिक बैंकिंग प्रणाली का हिस्सा बन चुकी है। सचिव के अनुसार, एक जन धन खाते में औसतन लगभग 4,815 रुपये जमा हैं, जो यह दिखाता है कि लोगों में बचत की आदत लगातार बढ़ रही है।
कब हुई थी शुरुआत?
प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत अगस्त 2014 में इस उद्देश्य के साथ की गई थी कि देश का हर परिवार कम से कम एक बैंक खाते तक पहुंच सके। पहले कई ग्रामीण और गरीब परिवार बैंकिंग व्यवस्था से दूर थे, लेकिन जनधन जैसी योजनाओं ने उन्हें वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। इस योजना के तहत खोले गए खाते जीरो बैलेंस अकाउंट होते हैं, यानी इन्हें खोलने के लिए किसी न्यूनतम राशि की जरूरत नहीं होती। साथ ही खाते के साथ दुर्घटना बीमा, ओवरड्राफ्ट सुविधा और डेबिट कार्ड जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं, जिससे पहली बार बैंकिंग से जुड़े लोगों को भी बुनियादी वित्तीय सुरक्षा मिल सके।
कार्यक्रम में एम. नागराजू ने बताया कि अब तक इस योजना के तहत 57 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जो दुनिया में किसी भी एकल वित्तीय समावेशन कार्यक्रम के तहत खोले गए खातों की सबसे बड़ी संख्या है। इन खातों में बढ़ते बैलेंस से यह संकेत मिलता है कि लोग धीरे-धीरे बचत को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थी भी बैंक के माध्यम से मिलने वाले लाभों पर भरोसा कर रहे हैं।
कितने हैं जनधन अकाउंट?
सचिव ने यह भी बताया कि जनधन खातों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनका अधिकतर हिस्सा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में है। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 78.2 प्रतिशत जनधन खाते ग्रामीण या अर्ध-शहरी इलाकों में खोले गए हैं। इससे साफ होता है कि इस योजना ने उन परिवारों को भी बैंकिंग का रास्ता दिखाया है जो आज तक औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से दूर थे। इसके अलावा, लगभग 50 प्रतिशत खाते महिलाओं के नाम से खोले गए हैं, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। बैंक खाते के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक पहचान मजबूत हुई है और उनमें वित्तीय निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ी है।
DBT से भेजे गए 3.67 लाख करोड़
नागराजू ने बताया कि सरकार ने भी जनधन खातों के माध्यम से सीधे बैंक खाते में पैसे भेजने की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है। चालू वित्त वर्ष में ही प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के तहत 3.67 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे गए। पहले कई लोगों को योजनाओं की राशि मिलने में देरी होती थी या बीच में कटौती हो जाती थी, लेकिन DBT ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और भरोसेमंद बना दिया है। अब सरकारी योजनाओं का पैसा बिना किसी बिचौलिये, बिना किसी बाधा के सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंच रहा है, जिससे न केवल लोगों का भरोसा बढ़ा है बल्कि योजनाओं का प्रभाव भी जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
कार्यक्रम के अंत में नागराजू ने कहा कि भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा लगातार आगे बढ़ रही है और जन धन योजना इस यात्रा की रीढ़ बन चुकी है। करोड़ों परिवारों का बैंकिंग सिस्टम से जुड़ना न केवल वित्तीय लेनदेन को आसान बनाता है, बल्कि सरकार के लिए भी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभ सीधे सही लोगों तक पहुंचाना सरल होता जा रहा है। जनधन खाते आज सिर्फ बैंक खाते नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण और गरीब परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा और विकास का माध्यम बन चुके हैं।
