आजकल घर, गाड़ी, पढ़ाई या पर्सनल जरूरतों के लिए लोन लेना बेहद आसान हो गया है। लेकिन लोन लेने के साथ ही हर महीने समय पर ईएमआई (EMI) चुकाने की एक बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। कई बार नौकरी छूट जाने, बीमारी या अचानक आए किसी वित्तीय संकट के कारण लोग समय पर अपनी ईएमआई का भुगतान नहीं कर पाते। एक-दो ईएमआई मिस होना आम बात लग सकती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लगातार ईएमआई न भरने पर बैंक आपको कानूनी रूप से 'डिफॉल्टर' (Defaulter) घोषित कर सकता है? बैंकिंग और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियमों के अनुसार, ईएमआई मिस करने की अवधि के हिसाब से बैंक आपके खिलाफ अलग-अलग सख्त कदम उठाते हैं, जिससे आपका वित्तीय करियर पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
कितनी EMI मिस करने पर आप बन जाते हैं डिफॉल्टर?
एक EMI मिस करने से क्या होता है?
सामान्य बैंकिंग नियमों के मुताबिक, जब आप पहली या दूसरी ईएमआई मिस करते हैं, तो बैंक तुरंत आपको डिफॉल्टर घोषित नहीं करता। पहली ईएमआई मिस होने पर बैंक इसे एक अनजानी भूल या तकनीकी समस्या मानकर आपको एसएमएस, ईमेल या कॉल के जरिए रिमाइंडर भेजता है। इसके साथ ही बैंक आपसे लेट पेमेंट फीस (Late Payment Charges) और पेनल्टी ब्याज वसूलना शुरू कर देता है। यदि आप लगातार दूसरी ईएमआई भी मिस कर देते हैं, तो बैंक का रवैया थोड़ा सख्त हो जाता है और वे आपको औपचारिक रिमाइंडर नोटिस भेजना शुरू कर देते हैं। हालांकि, दो ईएमआई मिस होने पर भी आपका लोन अकाउंट एक्टिव रहता है, लेकिन इसका आपके सिबिल स्कोर (CIBIL Score) पर बेहद बुरा असर पड़ना शुरू हो जाता है।
कब डिफॉल्टर बनते हैं आप?
असली कानूनी और तकनीकी मोड़ तब आता है जब आप लगातार तीन ईएमआई (90 दिनों तक) का भुगतान नहीं करते हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि किसी लोन की किश्त लगातार 90 दिनों तक बकाया रहती है, तो बैंक उस लोन अकाउंट को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर देते हैं। एनपीए श्रेणी में आते ही ग्राहक को आधिकारिक तौर पर 'डिफॉल्टर' मान लिया जाता है। 90 दिन बीत जाने के बाद बैंक आपको लोन चुकाने के लिए 60 दिनों का अंतिम कानूनी नोटिस भेजता है। इस अवधि के भीतर भी यदि कर्जदार पैसा चुकाने में असमर्थ रहता है, तो बैंक लोन की वसूली के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर देता है।
यदि लोन अनसिक्योर्ड (जैसे पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड) है, तो बैंक वसूली एजेंटों के जरिए या कोर्ट में केस दर्ज करके कानूनी प्रक्रिया अपनाता है। वहीं, यदि लोन सिक्योर्ड है (जैसे होम लोन या कार लोन), तो बैंकों के पास सरफेसी एक्ट (SARFAESI Act) के तहत विशेष अधिकार होते हैं। इस कानून के तहत बैंक बिना अदालत जाए भी आपकी गिरवी रखी संपत्ति, मकान या गाड़ी को जब्त कर सकता है और उसकी नीलामी करके अपना बकाया पैसा वसूल कर सकता है। डिफॉल्टर बनने का सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि आपका सिबिल स्कोर पूरी तरह खराब हो जाता है, जिससे भविष्य में किसी भी बैंक या वित्तीय संस्थान से दोबारा लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना लगभग असंभव हो जाता है। इसलिए, यदि कभी ईएमआई चुकाने में समस्या आए, तो बैंक से छिपने के बजाय तुरंत अपने बैंक से संपर्क करके री-स्ट्रक्चरिंग या समय बढ़ाने का अनुरोध करना चाहिए।
