भारत आज दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक बन चुका है। हमारी रसोई से लेकर बड़े-बड़े कारखानों तक, एलपीजी (LPG) और प्राकृतिक गैस (Natural Gas) की मांग जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में एलपीजी की दैनिक खपत और कुल सिलेंडरों की संख्या इतनी ज्यादा है कि इसे सुनकर कोई भी चौंक सकता है। यह केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह देश की बदलती जीवनशैली और बढ़ती आर्थिक ताकत का एक बड़ा सबूत है। 11 मार्च 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करोड़ों घरों की रसोई अब पूरी तरह से गैस पर निर्भर है, जिससे पारंपरिक ईंधन (लकड़ी या कोयला) की जगह अब 'क्लीन एनर्जी' ने ले ली है। ऐसे में आइए जानते हैं भारत में कितने एलपीजी सिलेंडर हैं?
कितने एलपीजी कनेक्शन हैं?
अगर हम संख्या की बात करें, तो भारत में कुल एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या 31 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। अगर हर कनेक्शन के पास 2 सिलेंडर हैं तो देश में 66 करोड़ गैस सिलेंडर हैं. इसमें से एक बड़ा हिस्सा 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' के तहत आता है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में गैस की पहुंच को मुमकिन बनाया है। ताज्जुब की बात यह है कि देश में हर दिन औसतन 50 लाख से 60 लाख सिलेंडर रिफिल किए जाते हैं। यानी हर 24 घंटे में लाखों घरों में नए सिलेंडर की डिलीवरी होती है। अगर आप इन सिलेंडरों को एक के ऊपर एक रखें, तो इसकी ऊंचाई दुनिया की सबसे ऊंची इमारतों को कई बार पीछे छोड़ देगी। इतनी बड़ी मांग को पूरा करने के लिए देश भर में फैले हजारों बॉटलिंग प्लांट्स और लाखों डिलीवरी एजेंट दिन-रात काम करते हैं।
कहां से आती है गैस?
प्राकृतिक गैस (Natural Gas) की बात करें, तो इसकी खपत में भी जबरदस्त उछाल देखा गया है। सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) के बढ़ते नेटवर्क के कारण अब लोग सिलेंडर के बजाय सीधे पाइपलाइन से गैस ले रहे हैं। इसके बावजूद, एलपीजी सिलेंडर की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। वर्तमान में भारत अपनी गैस जरूरतों का लगभग 50% से अधिक हिस्सा आयात (Import) करता है। कतर, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों से जहाजों के जरिए गैस भारत आती है। मार्च 2026 में चल रहे वैश्विक तनावों के बावजूद, भारत ने अपना 'एनर्जी स्टॉक' इस तरह मैनेज किया है कि दैनिक आपूर्ति में कोई बड़ी बाधा न आए।
इतने ज्यादा कनेक्शन के पीछे का कारण
इतनी भारी मांग के पीछे का एक मुख्य कारण मध्यम वर्ग का विस्तार और शहरीकरण है। जैसे-जैसे शहरों का दायरा बढ़ रहा है, गैस की खपत भी बढ़ती जा रही है। औद्योगिक क्षेत्र में भी प्राकृतिक गैस का उपयोग कोयले के विकल्प के रूप में किया जा रहा है ताकि प्रदूषण कम हो सके। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में भारत की ऊर्जा बास्केट में गैस की हिस्सेदारी को 6% से बढ़ाकर 15% तक ले जाया जाए। इसके लिए देश भर में नई पाइपलाइन बिछाई जा रही हैं और स्टोरेज क्षमता को भी बढ़ाया जा रहा है।
