भारत में कितने दिन की बची है LPG, लंबा चला वॉर तो क्या होगा कहां से आएगी रसोई गैस?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि हम अपनी जरूरत की आधी से ज्यादा एलपीजी (LPG) आयात करते हैं। अगर समुद्री रास्ते बाधित हुए और जंग लंबी खिंची, तो देश के पास मौजूद सीमित स्टॉक और सरकार की 'इमरजेंसी सप्लाई चैन' ही हमारी रसोई को बचा सकती है। आइए जानते हैं कि भारत के पास असल में कितने दिनों का गैस बैकअप है और संकट की स्थिति में सरकार ने किन देशों के साथ 'प्लान-बी' तैयार रखा है।

मिडिल-ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि हम अपनी जरूरत की 50% से ज्यादा एलपीजी (LPG) विदेशों से आयात करते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया और खबरों में एक ही सवाल सबसे ऊपर है अगर युद्ध लंबा खिंचा, तो भारत के पास कितने दिनों का गैस स्टॉक बचा है? क्या हमारे रसोई के चूल्हे ठंडे पड़ जाएंगे या सरकार के पास इस संकट से निपटने का कोई ठोस प्लान है?

lpg cylinder crisis

भारत में कहां से आती है गैस?

मौजूदा हालातों की बात करें तो भारत अपनी कुल एलपीजी मांग का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देशों से मंगाता है। भारत के पास आमतौर पर अपनी रिफाइनरियों, बॉटलिंग प्लांट्स और ट्रांजिट (रास्ते में आने वाले जहाज) को मिलाकर लगभग 10 से 15 दिनों का 'ऑपरेटिंग स्टॉक' रहता है। तेल के मामले में भारत के पास बड़े भूमिगत रणनीतिक भंडार (Strategic Petroleum Reserves) हैं जो हफ्तों तक चल सकते हैं, लेकिन एलपीजी को इस तरह स्टोर करना तकनीकी रूप से अधिक जटिल और महंगा होता है। इसलिए, एलपीजी की सप्लाई 'जस्ट-इन-टाइम' मॉडल पर ज्यादा निर्भर करती है, यानी गैस आती रहती है और सिलेंडरों में भरकर घरों तक पहुंचती रहती है।

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