आज के डिजिटल दौर में भले ही लोग गूगल पे, फोन पे या नेट बैंकिंग का इस्तेमाल ज्यादा करने लगे हैं, लेकिन बिजनेस और बड़े लेन-देन में आज भी बैंक चेक (Bank Cheque) का महत्व कम नहीं हुआ है। जब हमें कोई चेक देता है और हम उसे अपने बैंक खाते में जमा करते हैं, तो सबसे पहला ख्याल यही आता है कि यह पैसा हमारे अकाउंट में कब तक आएगा? पहले के समय में एक चेक को क्लियर होने में हफ्तों लग जाते थे, लेकिन अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कड़े नियमों और नई टेक्नोलॉजी की वजह से यह काम बहुत तेजी से होता है। आइए जानते हैं कि आपके चेक का पैसा आपके खाते में आने में कितना समय लगता है और इसको लेकर केंद्रीय बैंक के क्या नियम हैं।
CTS टेक्नोलॉजी ने बदला पूरा सिस्टम
पुराने समय में चेक को फिजिकली यानी एक बैंक से दूसरे बैंक की शाखा में भेजा जाता था, जिसमें काफी समय बर्बाद होता था। लेकिन अब आरबीआई ने पूरे देश में सीटीएस (Cheque Truncation System - CTS) लागू कर दिया है। इस सिस्टम के तहत, जब आप बैंक में चेक जमा करते हैं, तो बैंक उस चेक को कहीं भेजता नहीं है। बल्कि, बैंक उस चेक की एक हाई-क्वालिटी डिजिटल इमेज (स्कैन कॉपी) लेता है और उसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से क्लियरिंग हाउस और संबंधित बैंक को भेज देता है। इस तकनीक की वजह से चेक क्लियर होने का समय बेहद कम हो गया है।
स्थानीय चेक (Local Cheque) में कितना समय लगता है?
अगर आपको मिला हुआ चेक उसी शहर का है जिस शहर में आपका बैंक खाता है, तो इसे 'लोकल चेक' कहा जाता है। आरबीआई के सीटीएस (CTS) नियमों के मुताबिक, लोकल चेक आमतौर पर टी+1 (T+1) वर्किंग डेज में क्लियर हो जाता है। यहां 'T' का मतलब है वह दिन जब आपने वर्किंग ऑवर्स (कामकाजी घंटों) के दौरान बैंक में चेक ड्रॉप किया है। अगर आपने सोमवार को सुबह बैंक में चेक जमा किया है, तो मंगलवार की शाम या बुधवार की सुबह तक पैसा आपके खाते में क्रेडिट हो जाएगा। हालांकि, कई मामलों में अगर चेक सुबह जल्दी जमा किया जाए, तो वह उसी दिन शाम तक भी क्लियर हो जाता है।
बाहरी चेक (Outstation Cheque) के क्या हैं नियम?
अगर चेक किसी दूसरे शहर या दूसरे राज्य के बैंक का है, तो उसे 'आउटस्टेशन चेक' कहा जाता है। पहले इन्हें क्लियर होने में 7 से 15 दिन लगते थे, लेकिन सीटीएस ग्रिड (CTS Grid) बनने के बाद अब यह समय भी बहुत कम हो गया है। अब आउटस्टेशन चेक भी आमतौर पर 2 से 3 वर्किंग डेज के भीतर क्लियर हो जाते हैं। आरबीआई ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे आउटस्टेशन चेक को क्लियर करने में बेवजह की देरी न करें।
क्या देरी होने पर बैंक देता है हर्जाना?
जी हां, यह बेहद महत्वपूर्ण नियम है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आरबीआई (RBI) के नियमों के अनुसार, यदि बैंक तय समय सीमा के भीतर चेक क्लियर नहीं करता है और देरी बैंक की लापरवाही की वजह से होती है, तो बैंक को ग्राहक को मुआवजा (Interest/Penalty) देना पड़ता है। स्थानीय चेक में तय समय से ज्यादा की देरी होने पर बैंक को बचत खाते (Savings Account) की ब्याज दर के हिसाब से यात्री या ग्राहक को हर्जाना देना होता है।
