मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग, भारत में महंगा होगा MRI! हीलियम के 'संकट' ने बढ़ाई कंपनियों की टेंशन

जब हम युद्ध की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में कच्चे तेल (Crude Oil) और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का ख्याल आता है। लेकिन मौजूदा मिडिल ईस्ट संकट ने एक ऐसी गैस की सप्लाई को रोक दिया है, जो इंसानी जान बचाने वाली मशीनों के लिए 'ऑक्सीजन' के समान है।

दुनिया के एक कोने में छिड़ी जंग का असर दूसरे कोने की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा, ऐसा सोचना थोड़ा अजीब लग सकता है। लेकिन मिडिल ईस्ट (Middle East) में चल रहे तनाव ने भारत के चिकित्सा क्षेत्र के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। अस्पतालों की सबसे जरूरी मशीनों में से एक MRI (Magnetic Resonance Imaging) पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इस संकट की सबसे बड़ी वजह है 'हीलियम गैस' की किल्लत, जिसकी सप्लाई चेन युद्ध की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुई है।

Helium Budget

बढ़ सकती है हीलियम की कीमतें

अक्सर जब हम युद्ध की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में कच्चे तेल (Crude Oil) और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का ख्याल आता है। लेकिन मौजूदा मिडिल ईस्ट संकट ने एक ऐसी गैस की सप्लाई को रोक दिया है, जो इंसानी जान बचाने वाली मशीनों के लिए 'ऑक्सीजन' के समान है। हम बात कर रहे हैं तरल हीलियम (Liquid Helium) की। भारत में MRI स्कैन की लागत आने वाले दिनों में काफी बढ़ सकती है क्योंकि इस गैस की वैश्विक कमी (Helium Squeeze) ने मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनियों की नींद उड़ा दी है। हीलियम का इस्तेमाल MRI मशीनों के शक्तिशाली मैग्नेट्स को ठंडा रखने के लिए किया जाता है। यदि इन मैग्नेट्स को जरूरी ठंडक न मिले, तो मशीन काम करना बंद कर सकती है।

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