Home Loan EMI: जब आप अपने लिए घर खरीदने के लिए होम लोन लेते हैं तो बैंक कभी भी पूरी रकम की एक साथ नहीं मांगता। इसके बजाय आप बैंक को EMI (Equated Monthly Instalment) के रूप में हर महीने कुछ राशि चुकाते हैं। EMI एक निश्चित मासिक राशि होती है, जो लोन का मूलधन (Principal) और उस पर लगने वाला ब्याज (Interest) दोनों मिलाकर तय की जाती है। होम लोन हो चाहे ऑटो लोन यह राशि हर महीने एक ही तारीख को चुकानी होती है, जिससे आपको अपने बजट को प्लान करना आसान हो जाता है।
होम लोन ईएमआई (Photo: iStock)
पर्सनल बजटिंग होती है आसान
EMI का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप पहले से ही जानते हैं कि हर महीने कितना भुगतान करना है, जिससे आपकी व्यक्तिगत वित्तीय योजना (Budgeting) आसान होती है। वहीं बैंक या फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन को एक स्थिर और नियमित इनकम मिलती रहती है।
EMI कैसे काम करती है?
EMI एक ऐसी राशि है जिसमें आपका लोन का मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं। शुरुआत में आपके EMI में ब्याज का हिस्सा ज्यादा होता है और समय के साथ जैसे-जैसे आप लोन चुकाते हैं, ब्याज का हिस्सा घटता जाता है और मूलधन का हिस्सा बढ़ता है।
EMI कैसे कैलकुलेट की जाती है
बैंक और वित्तीय संस्थान ब्याज की गणना कई कारकों के आधार पर करते हैं, जैसे आपकी इनकम, पुनर्भुगतान क्षमता, क्रेडिट हिस्ट्री और वर्तमान बाजार की स्थिति। ईएमआई को गणित के एक फॉर्मूले का इस्तेमाल कर कैलकुलेट किया जाता है।
EMI को प्रभावित करने वाले फैक्टर
लोन राशि (Loan Amount): लोन राशि ईएमआई के लिए एक प्राइमरी फैक्टर है। जितनी अधिक राशि आप उधार लेते हैं, आपकी EMI उतनी ही ज्यादा होगी।
ब्याज दर (Interest Rate): आपके होम लोन को लेकर ब्याज दर दूसरा जरूरी फैक्टर है। ब्याज दर जितनी अधिक होगी, EMI उतनी अधिक होगी।
लोन अवधि (Tenure): होम लोन को लेकर लोन की अवधि तीसरा जरूरी फैक्टर है, जिससे आपकी ईएमआई प्रभावित होती है। लंबी अवधि में EMI कम होती है, लेकिन कुल ब्याज ज्यादा देना पड़ता है। वहीं, कम अवधि में EMI अधिक हो सकती है।
EMI का बदलना
साधारण परिस्थितियों में EMI पूरे लोन की अवधि में एक जैसी रहती है। यानी हर महीने आपको लगभग एक ही राशि चुकानी होती है।
लेकिन कुछ स्थितियों में EMI बदल सकती है-
- अगर आपने लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर लिया है, तो ब्याज दर मार्केट के हिसाब से बदलती रहती है। जैसे-जैसे ब्याज दर कम होगी, आपकी EMI भी कम हो जाएगी। ब्याज दर बढ़ेगी तो EMI बढ़ सकती है।
- अगर आप लोन का कुछ हिस्सा पहले ही चुका देते हैं (Prepay) तो आपका Principal Amount कम हो जाता है। इसके बाद अगर आप लोन की अवधि (Tenure) को पहले जैसा रखते हैं तो EMI भी कम हो सकती है। यानी छोटी अवधि में ज्यादा रकम चुका देने से हर महीने का भुगतान कम हो जाएगा।
