ऑनलाइन लेन-देन बढ़ने के साथ साइबर फ्रॉड की घटना तेजी से बढ़ी है। साइबर फ्रॉड नए-नए तरीके का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 की दूसरी छमाही और 2026 की पहली छमाही के बीच टेक्स्ट-मैसेज आधारित स्कैम में, पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 146 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यानी साइबर फ्रॉड टेक्स्ट-मैसेज भेजकर लोगों का अकाउंट खाली कर रहे हैं। ऐसे में बैंकिंग एक्सपर्ट का कहना है कि हर किसी को इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए सावधान रहने की जरूरत है। हम आपको बता रहे हैं कि किस तरह से फ्रॉड को अंजाम दिया जा रहा है और आप उससे कैसे बच सकते हैं।
बैंक फ्रॉड
टेक्स्ट मैसेज से कैसे होता है स्कैम?
जानकारों का कहना है कि टेक्स्ट मैसेज बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचने का एक सस्ता तरीका है। साइबर फ्रॉड बैंकों और सरकारी संगठनों की आड़ में टेक्स्ट मैसेज के जरिये धोखाधड़ी का अंजाम देते हैं। वे बैंक के नाम पर फर्जी मैसेज भेजकर फ्रॉड करते हैं। वो आम लोगों को मैसेज भेजकर गलत एप्लीकेशन पर ले जाकर फ्रॉड को अंजाम देते हैं।
नो योर कस्टमर (KYC) या अकाउंट-ब्लॉक स्कैम पीड़ितों को ऐसे ही दिखने वाले बैंक पेज पर ले जाते हैं जो लॉगिन क्रेडेंशियल और OTP कैप्चर करते हैं। अकाउंट-सस्पेंशन या अकाउंट-लॉक मैसेज बैंकिंग सर्विस का एक्सेस खोने के डर का इस्तेमाल करते हैं। धोखेबाज टेक्स्ट की तरफ इसलिए भी बढ़ गए हैं क्योंकि वॉइस कॉल को ट्रेस करना और ब्लॉक करना आसान होता है।
चेतावनी के संकेतों को पहचानें
अगर आपके फोन पर कोई मैसेज आए और उसमें कोई लिंक दिया हो, तो उस पर क्लिक करने से पहले उसे ध्यान से जांच लें। छोटे (Short) URL, गलत स्पेलिंग वाले वेबसाइट नाम या अजीब वेब एड्रेस फ्रॉड का संकेत हो सकते हैं। अगर कोई मैसेज या फोन कॉल आपसे OTP, पासवर्ड या PIN मांगता है, तो समझ जाइए कि यह ठगी हो सकती है। बैंक या कोई सरकारी संस्था कभी भी इस तरह आपकी गोपनीय जानकारी नहीं मांगती।
इसी तरह, अगर बिना मांगे लोन, निवेश या इनाम का ऑफर मिले, तो उस पर भरोसा न करें। अगर कोई मैसेज बैंक या सरकारी विभाग के नाम से आया हो, लेकिन वह किसी सामान्य 10 अंकों के मोबाइल नंबर से भेजा गया हो, तो उसे भी संदेह की नजर से देखें।
अगर आपसे किसी रिमोट एक्सेस ऐप या APK फाइल को डाउनलोड और इंस्टॉल करने के लिए कहा जाए, तो ऐसा बिल्कुल न करें। इससे साइबर ठग आपके फोन और बैंक खाते तक पहुंच बना सकते हैं।
इसके अलावा, "पार्सल अटका है", "आपका बैंक अकाउंट बंद होने वाला है", "सरकारी नोटिस जारी हुआ है" या "परिवार में इमरजेंसी है" जैसे मैसेज अक्सर लोगों को घबराकर तुरंत कार्रवाई करने के लिए भेजे जाते हैं। ऐसे किसी भी मैसेज पर बिना जांचे-परखे भरोसा न करें।
इस तरह सही और गलत का फैसला करें
किसी मैसेज को उसमें दिए गए कॉन्टैक्ट डिटेल्स या लिंक का इस्तेमाल करके कभी भी वेरिफाई न करें। बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट, मोबाइल एप्लिकेशन या कस्टमर केयर नंबर के ज़रिए रिक्वेस्ट वेरिफाई करें। आप डेबिट कार्ड या पासबुक पर छपे नंबर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपको कोई अलर्ट मिला है, तो बैंक के ऑफिशियल ऐप या वेबसाइट का इस्तेमाल करके भी उसे कन्फर्म करें। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) या इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) से आने का दावा करने वाले मैसेज को उनके ऑफिशियल वेबपेज के ज़रिए वेरिफाई करें। चालान और बिल सीधे संबंधित ऑफिशियल पोर्टल पर चेक करें।
मैसेज का जवाब देने से पहले थोड़ी देर रुकें। कभी भी किसी अनचाहे मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक न करें या बैंकिंग जानकारी अपडेट करने के लिए एम्बेडेड लिंक का इस्तेमाल न करें। यह सावधानी SMS, WhatsApp और दूसरे मैसेजिंग एप्लिकेशन के ज़रिए मिले मैसेज पर लागू होती है।
