Gold vs USD : फिलहाल अंतरराष्ट्रीय कारोबार का बड़ा हिस्सा डॉलर पर निर्भर है। लेकिन, दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों का अब डॉलर पर भरोसा घट रहा है। यह कोई कयासबाजी नहीं है, बल्कि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WCG) के आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं। WCG की सालाना रिपोर्ट 'सेंट्रल बैंक गोल्ड रिजर्व सर्वे 2026' के मुताबिक ग्लोबल फाइनेंस मार्केट में अभूतपूर्व भूचाल आया हुआ है।
डॉलर के मुकाबले गोल्ड पर बढ़ा भरोसा
रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में उभर रहा नया ट्रेंड अमेरिका की नींद उड़ाने वाला है। क्योंकि, ग्लोबल इकोनॉमी पर अमेरिका की धाक की सबसे बड़ी वजह US Dollar से दुनियाभर के बैंकों का भरोसा उठ रहा है। तमाम केंद्रीय बैंक लगातार गोल्ड की खरीदारी कर रहे हैं। WCG Report 2026 के मुताबिक 74 फीसदी केंद्रीय बैंकों को डर है कि आने वाले दिनों में डॉलर का वर्चस्व घटेगा।
रिजर्व बैंक का मास्टरस्ट्रोक
WCG की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि किस तरह भारतीय रिजर्व बैंक ने इस ग्लोबल ट्रेंड को पहले से ही भांप लिया और न सिर्फ गोल्ड की जमकर खरीदारी की है। बल्कि, अपने गोल्ड स्टॉक को अपने कब्जे में लेना शुरू कर दिया है। 2023 की शुरुआत में जहां देश का 55 फीसदी गोल्ड रिवर्ज देश की सीमाओं से बाहर था। लेकिन, मार्च 2026 तक कुल रिजर्व का 77 फीसदी भारत में सीधे रिजर्व बैंक के कब्जे में आ चुका है। WSG की रिपोर्ट में इसे एक ऐसा 'साइलेंट मास्टरस्ट्रोक' बताया गया है, जिसने पूरी दुनिया के अर्थशास्त्रियों को हैरान कर दिया है।
लंदन की तिजोरी खाली
अमेरिका और पश्चिम देशों की तरफ से जिस तरह रूस और ईरान जैसे देशों की संपत्तियों को फ्रीज किया गया, उसे देखते हुए भारत ने अपनी आर्थिक संप्रभुता (Economic Sovereignty) को मजबूत करने के लिए पिछले 3 साल में सीक्रेट ऑपरेशन चलाया और बैंक ऑफ इंग्लैंड व स्विट्जरलैंड के वॉल्ट्स में रखे गोल्ड को भारत लाया गया है। RBI ने यह फैसला उस दौर में किया है, जब रिकॉर्ड 74% रिजर्व मैनेजर्स का मानना है कि अगले 5 सालों में वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार (Global Reserves) में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी भारी गिरावट के साथ सिमट जाएगी।
गोल्ड पर बढ़ा भरोसा
यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) के मुताबिक, सोने ने अमेरिकी सरकारी बॉन्ड्स (US Treasuries) को पछाड़कर दुनिया के नंबर-1 रिजर्व एसेट का तमगा हासिल कर लिया है।इसके अलावा सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि 45% देशों ने साफ कहा है कि वे अगले 12 महीनों में अपने खजाने में सोने की मात्रा को और ज्यादा बढ़ाने जा रहे हैं।
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