Gold Investment: 2025 की पहली छमाही में सोने ने निवेशकों को करीब 27% का मजबूत रिटर्न दिया है। वित्त वर्ष 2025 की शुरुआत से अब तक यह रिटर्न 33% तक पहुंच चुका है, जिससे यह सभी परिसंपत्ति वर्गों में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले निवेश विकल्पों में शामिल हो गया है। हालांकि, एक्सपर्ट अब आने वाले समय को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।
सोना चढ़ा शिखर पर, क्या अब गिरेगा भाव? (तस्वीर-istock)
सोने की तेजी में संभावित विराम
न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक मेहता इक्विटीज लिमिटेड के उपाध्यक्ष (जिंस) राहुल कलंत्री का कहना है कि सोना भले ही सुरक्षित निवेश बना हुआ है, लेकिन मौजूदा कीमतें काफी ऊँचाई पर पहुंच गई हैं। एमसीएक्स पर सोना जून 2025 के अंत में 96,075 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जो जनवरी 2025 में 76,772 रुपये था। उनका मानना है कि अब जबकि वैश्विक आर्थिक माहौल में सुधार हो रहा है, सोने की कीमतों में कुछ गिरावट आ सकती है या फिर वे एक स्थिर स्तर पर रुक सकती हैं।
निवेशकों के लिए सलाह: नए निवेश से बचें
राहुल कलंत्री के अनुसार, इस समय नए निवेशकों को सोने में निवेश करने से बचना चाहिए, खासकर मौजूदा उच्च स्तरों पर। अल्पकालिक निवेशकों के लिए वे चांदी में निवेश करने की सलाह देते हैं क्योंकि औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक विस्तार से इसमें बेहतर रिटर्न की संभावना हो सकती है।
मानव मोदी की राय: निवेश से पहले प्रतीक्षा करें
न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के वरिष्ठ विश्लेषक मानव मोदी ने भी इस विचार का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा तेजी लंबी खिंच रही है। इससे पहले कि कीमतें दोबारा बढ़ें, थोड़ी ठहराव या गिरावट आ सकती है, जो लॉन्ग टर्म निवेश के लिए एक बेहतर अवसर हो सकता है।
कीमतों को समर्थन देने वाले प्रमुख कारण
एक्सपर्ट्स ने इस साल सोने की कीमतों में तेजी के कई कारण बताए हैं:-
- उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंकों द्वारा आक्रामक खरीदारी
- वैश्विक भूराजनीतिक तनाव
- कमजोर अमेरिकी डॉलर
- फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद
- वैश्विक महंगाई और आर्थिक मंदी की चिंता
- भारत और चीन में मजबूत खुदरा मांग
आने वाले छह महीने: जोखिम और सतर्कता दोनों जरूरी
न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक कलंत्री का मानना है कि आने वाले छह महीनों में सुधार संभव है। जब तक ब्याज दरों की उम्मीदों या वैश्विक जोखिम में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता, तब तक बाजार का परिदृश्य स्थिर से नकारात्मक रह सकता है। मानव मोदी ने भी कहा कि ईरान-इजराइल युद्ध जैसे जोखिम घटने से कीमतों को नई गति नहीं मिल रही है। हालांकि, अगर फिर से अनिश्चितता बढ़ती है या ब्याज दरों में कटौती होती है, तो सोने को समर्थन मिल सकता है।
गोल्ड ईटीएफ बनाम भौतिक सोना: कौन बेहतर?
इस पर कलंत्री का कहना है कि सोने में निवेश का तरीका व्यक्ति की सुविधा, उद्देश्य और निवेश अवधि पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि सोने की खरीद में सबसे महत्वपूर्ण है कि निवेश रणनीतिक और अनुशासित हो।
निवेश के विकल्प और उनकी विशेषताएं
| विकल्प | फायदे |
| गोल्ड ईटीएफ | नकदीकरण में आसानी, कम खर्च |
| गोल्ड म्यूचुअल फंड (SIP) | नियमित निवेश के लिए उपयुक्त |
| भौतिक सोना (सिक्के/छड़) | अगर अपने पास रखना पसंद हो |
| सरकारी स्वर्ण बॉन्ड | ब्याज और टैक्स लाभ (अब बंद) |
सोच-समझकर करें निवेश
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए, सोने में नया निवेश करने से पहले निवेशकों को धैर्य और विवेक से काम लेना चाहिए। लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने की योजना है तो गिरावट का इंतजार कर खरीदना समझदारी होगी। अल्पकालिक लाभ की चाह रखने वालों को वैकल्पिक धातुओं जैसे चांदी पर भी ध्यान देना चाहिए।
