Gold price target 2024: सोना सबसे सुरक्षित निवेश साधन माना जाता है। सोने में निवेश करने से निवेशकों को बहुत कम समय में ही बहुत ज्यादा रिटर्न मिलता रहा है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि यह आगे भी बरकरार रहने वाला है। क्या लोगों को अब यह पीली धातु की अधिक खरीदारी करनी चाहिए? ईटी नाउ के मुताबिक मोतीलाल ओसवाल को लगता है कि सोने में जल्द ही बड़ी तेजी आने वाली है। कीमती धातु ने 2024 में अब तक 14 प्रतिशत की बढ़त हासिल कर ली है और इसके और भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। ब्रोकरेज ने सोने को ऊपर की ओर बढ़ने का लक्ष्य देते हुए कहा है कि यह हर 10 ग्राम पर 12,000 रुपए का लाभ दे सकता है। इसने कहा कि सोने ने साल की शुरुआत स्थिर तरीके से की लेकिन तेजी की गति काफी बढ़ गई है।
सोना में इस साल मिलेगा जबरदस्त रिटर्न! (तस्वीर-Canva)
कहां तक पहुंच सकता है सोना
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा कि सोने ने साल की शुरुआत स्थिर तरीके से की लेकिन घरेलू बाजार में इस साल अब तक करीब 14 प्रतिशत की तेजी दर्ज करते हुए तेजी की गति में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट में इस साल चांदी में दर्ज की गई आश्चर्यजनक वृद्धि की ओर भी इशारा किया गया है। जिसने YTD आधार पर 27 प्रतिशत की तेजी दर्ज की है। कीमती धातु के लिए पॉजिटिव स्थिति बनाए रखते हुए ब्रोकरेज ने घरेलू बाजार में संभावित लक्ष्य को संशोधित कर 81,000 रुपए कर दिया है। इसने सोने के लिए 'गिरावट पर खरीदारी' दृष्टिकोण की सिफारिश की है, जिसमें 69,000 रुपये के करीब जमा करने की सलाह दी गई है। COMEX पर MOFSL ने निवेशकों को 2650 डॉलर के लक्ष्य के लिए 2250 डॉलर के आस-पास जमा करना शुरू करने की सलाह दी है।
सोना-चांदी में रिटर्न
अप्रैल 2024 के महीने में सोने ने 8 प्रतिशत रिटर्न दिया है जबकि चांदी में 6 प्रतिशत की तेजी आई है। मार्च 2024 में सोने में 9 प्रतिशत की तेजी आई थी जबकि चांदी में 6 प्रतिशत का रिटर्न मिला था। ईटी नाउ के मुताबविक मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में कमोडिटी रिसर्च के ग्रुप सीनियर वीपी नवनीत दमानी ने कहा कि भू-राजनीतिक टेंशन ने सोने के लिए जोखिम प्रीमियम को बढ़ा दिया है क्योंकि कर्ज को लेकर चिंताएं समग्र विकास के लिए लॉन्ग टर्म चुनौतियां पेश करती हैं। अमेरिका के इकोनॉमिक इंडिकेटर अर्थव्यवस्था में मजबूती दिखाते रहते हैं। इसके अलावा केंद्रीय बैंक की खरीदारी के साथ-साथ त्योहारी और शादी-ब्याह से जुड़ी घरेलू डिमांड से भी धारणा को बढ़ावा मिल सकता है।
