Diwali Gold-Sivler Shopping: इस साल शेयर बाजार ही नहीं, सोने और चांदी में भी बिकवाली का तूफान है। सोना अपने रिकॉर्ड हाई से 21% और चांदी 54% सस्ती हो चुकी है। दोनों कीमती धातु की कीमतों पर नजर डालें तो सोना ₹1,80,799 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड हाई से गिरकर आज (21 अक्टूबर, 2026) ₹1,41,806 पर आ गया है। वहीं, चांदी का भाव ₹4,20,048 प्रति किलो से टूटकर ₹1,92,800 पर पहुंच गया है। त्योहारी सीजन में सोने-चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट आम लोगों के लिए अच्छी खबर है। कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए सोने और चांदी की कीमतों में अभी और गिरावट आ सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि बाजार में इस बिकवाली की मुख्य वजह क्या है और कीमतों में आगे कितनी और गिरावट आ सकती है।
रिकॉर्ड हाई से कितने गिरे भाव?
| कमोडिटी | रिकॉर्ड हाई (29 जनवरी 2026) | आज का भाव | रिकॉर्ड हाई से गिरावट (%) |
| गोल्ड MCX | ₹1,80,799 | ₹1,41,806 | -21.57% |
| सिल्वर MCX | ₹4,20,048 | ₹1,92,800 | -54.10% |
क्यों सोने और चांदी में जारी है गिरावट?
1. कच्चे तेल में आग: ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर युद्ध शुरू होने की खबर है। वहीं, दूसरी ओर हूती सऊदी अरब पर लगातर हमले कर रहा है। इससे कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़कर 112 डॉलर के पार पहुंच गई है। कच्चे तेल के कारण ऊर्जा की लागत बढ़ने से महंगाई लंबे समय तक ऊंची बने रहने की आशंका बढ़ गई है। इसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ रहा है।
2. ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद: कच्चा तेल महंगा होने से दुनियाभर में महंगाई बढ़ रही है। दुनियाभर के केंद्रीय बैंक बढ़ती महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर रहे हैं। अमेरिकी फेड की बैठक में भी एक बार फिर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद है। इससे निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है। सोना और चांदी से नियमित ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के दौर में निवेशकों के लिए इन्हें रखने की लागत बढ़ जाती है। इसका असर भी दोनों कीमती धातु पर हो रहा है।
3. अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना: डॉलर मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में दूसरी मुद्राओं का इस्तेमाल करने वाले खरीदारों के लिए सोना और चांदी महंगे हो जाते हैं। इसका भी दबाब सोने और चांदी पर हो रहा है।
4. औद्योगिक मांग: सोने के मुकाबले चांदी में ज्यादा गिरावट की एक वजह इसका औद्योगिक इस्तेमाल भी है। चांदी का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा समेत कई उद्योगों में होता है। वैश्विक आर्थिक विकास और मैन्युफैक्चरिंग की मांग कमजोर होने से चांदी की कीमतों पर सोने की तुलना में ज्यादा दबाव पड़ रहा है।
कमोडिटी एक्सपर्ट का क्या कहना है?
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर, अजय केडिया ने बताया कि मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण 'सुरक्षित निवेश' (सेफ-हेवन) की मांग घटी, बिकवाली का दबाव बढ़ा है। इससे 'गरीबों का सोना' और 'शैतान की धातु' (डेविल्स मेटल) के नाम से जानी जाने वाली चांदी में 2026 के दौरान भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। MCX पर चांदी की कीमत जनवरी के अपने उच्चतम स्तर ₹4,20,048 से 54.10% गिरकर ₹1,92,800 प्रति किलोग्राम पर आ गई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत $121.64 से 56.04% घटकर $53.47 रह गई है।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष ने 'सुरक्षित निवेश' (सेफ-हेवन) के पारंपरिक चलन को उलट दिया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत $110 के ऊपर होने और बढ़ती महंगाई के जोखिमों के चलते, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें बढ़ गई हैं, जिससे कीमती धातुओं (बुलियन) पर दबाव पड़ा है। साथ ही, इक्विटी बाजार में कमजोरी और मार्च की शुरुआत में UAE में प्रॉपर्टी सौदों की संख्या में 37% की गिरावट यह दर्शाती है कि निवेशक सतर्क हैं और बाजार में नकदी (लिक्विडिटी) का दबाव है।
हालांकि, चांदी के बुनियादी आधार (फंडामेंटल्स) अभी भी मजबूत बने हुए हैं। इसकी लगभग 50% मांग औद्योगिक कार्यों से जुड़ी है और बाजार में लगातार आपूर्ति की कमी बनी हुई है। हमारा मानना है कि कीमतों में आई यह गिरावट धीरे-धीरे खरीदारी (एक्युमुलेशन) का मौका देती है, जिसमें 50 डॉलर के स्तर एक अहम सपोर्ट का काम करेगा। जैसे-जैसे भू-राजनीतिक (जियोपॉलिटिकल) तनाव कम होगा, अगली धनतेरस तक चांदी की कीमत वापस $90–100 के स्तर तक पहुंच सकती है, हालांकि उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
क्या सोना-चांदी अभी और सस्ता होगा?
इस सवाल का सटीक जवाब देना मुश्किल है। कीमतों की अगली चाल मुख्य रूप से तीन बातों पर निर्भर करेगी।
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख: अगर ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर होती है, तो सोने-चांदी पर दबाव बना रह सकता है। इसके विपरीत, नरम रुख कीमतों को सहारा दे सकता है।
- कच्चे तेल और महंगाई का रुख: तेल की कीमतें ऊंची रहने और महंगाई बढ़ने से ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है। इससे कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
- वैश्विक तनाव और निवेशकों की मांग: भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है। हालांकि, अगर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी बनी रहती है, तो इस मांग का असर सीमित भी हो सकता है।
दिवाली तक और कितना सस्ता हो सकता है?
चांदी खरीदने का मौका
केडिया एडवाइजरी के संस्थापक एवं निदेशक, अजय केडिया के मुताबिक, दिवाली तक सोने और चांदी की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। साना टूटकर 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है। वहीं, चांदी की कीमत गिरकर 1.90 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक आ सकती है।
खरीदारों को अब क्या करना चाहिए?
सोने और चांदी में आई बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल खरीदारी का है। लेकिन रिकॉर्ड हाई से कीमतों का नीचे आना अपने आप में इस बात की गारंटी नहीं है कि मौजूदा स्तर सबसे निचला स्तर है।
आभूषण खरीदने वालों के लिए: त्योहारी सीजन में सोने और चांदी में गिरावट बेहतरीन मौका लेकर आया है। आप इस भाव पर सोने या चांदी के गहने बुक कर सकते हैं।
निवेशकों के लिए: निवेश का फैसला अपनी वित्तीय जरूरत, जोखिम उठाने की क्षमता और कुल पोर्टफोलियो में सोने-चांदी की हिस्सेदारी को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
