Weak Monsoon : आने वाले महीनों में भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) को एक बड़े आर्थिक झटके का सामना करना पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी S&P ग्लोबल रेटिंग्स (S&P Global Ratings) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अगर देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रहता है, तो इससे किसानों की आमदनी घटने, महंगाई बढ़ने और ग्रामीण इलाकों में सामानों की मांग सुस्त होने की पूरी आशंका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बारिश सामान्य से कम होने पर कृषि, एग्रोकेमिकल्स (कीटनाशक और खाद), ट्रैक्टर, टू-व्हीलर (दोपहिया वाहन) और माइक्रोफाइनेंस (छोटा कर्ज देने वाले संस्थान) जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
कमजोर मानसून से भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दोहरा संकट
न्यूज एसेंजी एएनआई के मुताबिक S&P ग्लोबल रेटिंग्स का मानना है कि भारत के ग्रामीण बाजारों पर इस समय दोहरा संकट मंडरा रहा है। एक तरफ जहां दक्षिण-पश्चिम मानसून के उम्मीद से काफी सूखा रहने की आशंका है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण खेती-किसानी में इस्तेमाल होने वाले इनपुट जैसे खाद और बीज की लागत लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दोहरे दबाव का सबसे सीधा और बुरा असर कृषि क्षेत्र पर देखने को मिलेगा। फसलों की पैदावार कम होने से किसानों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे वे ट्रैक्टर या मोटरसाइकिल जैसे महंगे उत्पाद खरीदने से बचेंगे।
महंगाई बढ़ने और बिजली उत्पादन घटने का खतरा
कमजोर मानसून सिर्फ ग्रामीण मांग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि फसलों का उत्पादन घटने से खाद्य पदार्थों की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जिससे आम आदमी का बजट बिगड़ेगा। इसके अलावा, कम बारिश होने के कारण देश के जलाशयों में पानी का स्तर नीचे जा सकता है। ऐसी स्थिति में देश का हाइड्रोइलेक्ट्रिक (जल विद्युत) बिजली उत्पादन भी 10% से 15% तक गिर सकता है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में बिजली की किल्लत या महंगी बिजली का सामना करना पड़ सकता है।
बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर पर पड़ेगा असर
इस कमजोर मानसून का असर देश के फाइनेंशियल सेक्टर पर भी देखने को मिल सकता है। S&P की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में आर्थिक सुस्ती के चलते बैंकों की लोन ग्रोथ (Credit Growth) की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। साथ ही, कृषि से जुड़े लोन की एसेट क्वालिटी में भी मामूली गिरावट आ सकती है, जिसका मतलब है कि बैंकों का फंसा हुआ कर्ज थोड़ा बढ़ सकता है। हालांकि, रिपोर्ट का यह भी कहना है कि मजबूत मुनाफे के कारण बैंकों की कुल कमाई पर इसका बहुत बड़ा या गंभीर असर होने की आशंका कम है।
माइक्रोफाइनेंस कंपनियां सबसे ज्यादा संवेदनशील
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (MFIs) को लेकर जताई गई है। बड़े बैंकों की तुलना में छोटे कर्ज देने वाली ये कंपनियां अधिक जोखिम में हैं। इसका कारण यह है कि माइक्रोफाइनेंस कंपनियों का अधिकांश बिजनेस ग्रामीण इलाकों के छोटे कर्जदारों पर निर्भर करता है, जिनकी वित्तीय स्थिति बड़े लोन लेने वालों की तुलना में पहले से ही कमजोर होती है। मानसून खराब होने पर इन छोटे कर्जदारों की लोन चुकाने की क्षमता सबसे पहले प्रभावित होती है, जिससे MFIs के एनपीए (NPA) बढ़ने का खतरा काफी ज्यादा रहता है।
राहत की बात: देश का मजबूत वित्तीय ढांचा
इन तमाम जोखिमों के बावजूद, S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक सकारात्मक पहलू भी सामने रखा है। S&P ग्लोबल की क्रेडिट एनालिस्ट गीता चुघ का कहना है कि हालांकि मानसून फेल होने से कृषि से जुड़ी संपत्तियों की गुणवत्ता में थोड़ी गिरावट आ सकती है, लेकिन भारत का वित्तीय सिस्टम इस झटके को झेलने के लिए पूरी तरह से लचीला और मजबूत है। देश में गैर-कृषि विकास इंजन तेजी से उभर रहे हैं। इसके साथ ही, बैंकों की सतर्क लोन नीतियां और रिजर्व बैंक के समय पर उठाए जाने वाले कदम देश को किसी बड़े क्रेडिट संकट से बचा लेंगे।
