हर माता-पिता अपनी पूरी जिंदगी पाई-पाई जोड़कर जो घर और संपत्ति बनाता है, उसका मकसद यही होता है कि उसके बाद उसके बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहे। लेकिन अक्सर एक सवाल हर माता-पिता के मन में कौंधता है कि जीवित रहते ही बच्चों के नाम संपत्ति (Gift Deed) कर दी जाए, या फिर वसीयत (Will) बनाकर छोड़ दी जाए? दोनों तरीकों से संपत्ति बच्चों की हो जाती है, लेकिन दोनों की प्रक्रिया, कानूनी प्रभाव और नियंत्रण अलग-अलग होते हैं। इसलिए फैसला सिर्फ इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि कौन सा तरीका आसान है, बल्कि यह बातों पर निर्भर करता है, जैसे कि संपत्ति पर कंट्रोल, टैक्स और स्टाम्प ड्यूटी का असर, झगड़े की संभावना और बच्चों के रहने की जगह। आइए समझते हैं कि इन दोनों में किसका कब इस्तेमाल करना बेहतर होता है।
बच्चों को प्रॉपर्टी देना
Gift Deed और Will में क्या अंतर है?
Gift Deed के जरिए माता-पिता अपनी जिंदगी में ही संपत्ति को बच्चे के नाम ट्रांसफर कर सकते हैं। वहीं, Will में माता-पिता का संपत्ति पर जीवनभर अधिकार रहता है। उनकी मृत्यु के बाद ही बच्चों को मालिकाना हक मिलता है। यानी अगर आप चाहते हैं कि बच्चा अभी से संपत्ति का मालिक बन जाए, तो Gift एक विकल्प हो सकता है। लेकिन अगर आप जीवनभर संपत्ति पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं तो Will ज्यादा उपयुक्त हो सकती है।
दोनों में कौन सा विकल्प बेहतर?
जानकारों का कहना है कि दोनों ही उत्तराधिकार और विरासत को आगे बढ़ाने के असरदार तरीके हैं। सही विकल्प इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति की मंशा क्या है, वसीयत को चुनौती मिलने की कितनी संभावना है, संपत्ति पर अपना अधिकार बनाए रखने की जरूरत है या नहीं, और टैक्स, स्टाम्प ड्यूटी और परिवार के रहने की जगह से जुड़े तकनीकी पहलू क्या हैं।
भारत में संपत्ति रखने वाले भारतीय निवासियों के मामले में, करीबी रिश्तेदारों को दिए गए गिफ्ट पर आम तौर पर इनकम टैक्स नहीं लगता, हालांकि स्टाम्प ड्यूटी लग सकती है। वसीयत के जरिए मिली संपत्ति पर भी इनकम टैक्स या स्टाम्प ड्यूटी नहीं लगती। लेकिन, एक बार संपत्ति ट्रांसफर हो जाने के बाद, उससे होने वाली किसी भी आय पर बच्चों को टैक्स देना होगा।
अचल संपत्ति के लिए गिफ्ट डीड जरूरी
अचल संपत्ति (जैसे जमीन या घर) को गिफ्ट करने के लिए गिफ्ट डीड की जरूरत होती है, जबकि चल संपत्ति (जैसे कैश या गहने) को बिना इसके भी गिफ्ट किया जा सकता है। गिफ्ट डीड पर सही स्टैम्प ड्यूटी लगी होनी चाहिए और इसे संबंधित राज्य के कानूनों के तहत रजिस्टर करवाना जरूरी है। कुछ राज्य तब रियायती स्टैम्प ड्यूटी दरें देते हैं जब रिहायशी या कृषि संपत्ति करीबी रिश्तेदारों को गिफ्ट की जाती है। इसके उलट, वसीयत के जरिए ट्रांसफर की गई संपत्ति पर कोई स्टैम्प ड्यूटी नहीं लगती।
गिफ्ट देने का मतलब है मालिकाना हक छोड़ना
सबसे अहम बातों में से एक यह है कि क्या माता-पिता को उस संपत्ति का इस्तेमाल जारी रखने की जरूरत है। एक बार जीवनकाल में गिफ्ट दे देने के बाद, बच्चे कानूनी मालिक बन जाते हैं और माता-पिता शायद उस संपत्ति का फायदा न उठा सकें या उसका इस्तेमाल न कर सकें। दूसरी ओर, वसीयत के जरिए संपत्ति का ट्रांसफर माता-पिता के जीवनकाल के बाद ही होता है, जिससे वे अपने जीवनकाल में मालिकाना हक और कंट्रोल अपने पास रख सकते हैं।
