शेयर बाजार पिछले दो दिन में लुढ़कर मार्च वाले लेवल्स की तरफ बढ़ता दिख रहा है। खासतौर पर Nifty, Sensex, Bank nifty, और Nifty IT जैसे बड़े इंडेक्स पिछले 5 दिन में 2 से 5% तक लुढ़क गए हैं। वहीं, इस साल अब तक पूरी तस्वीर देखें, तो ये सभी इंडेक्स 10 से 25% तक लुढ़क चुके हैं।
निवेशकों को लग रहे झटके पर झटके
क्यों निवेशकों की टेंशन बढ़ी?
निवेशकों के बीच चिंता की सबसे बड़ी वजह है, बड़े लार्जकैप स्टॉक्स में बड़ी गिरावट। क्योंकि, आमतौर पर लार्जकैप स्टॉक्स को लेकर धारणा यही रही है कि उनमें वोलैटिलिटी कम रहती है। लेकिन, पिछले 4 महीने में बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में ही भारी उतार-चढ़ाव आया है। इसके अलावा Reliance Industries, HDFC Bank और TCS जैसे मार्केट लीडर स्टॉक्स की सबसे ज्यादा धुलाई हुई है।
म्यूचुअल फंड का ट्रेंड भी बदला
AMFI के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी से मार्च के बीच शेयर बाजार की स्थिति को देखते हुए म्यूचुअल फंड ट्रेंड भी बड़ा बदलाव आया है। इस दौरान इक्विटी कैटेगरी में म्यूचुअल फंड का इनफ्लो 5 फीसदी तक घट गया है। यह बताता है कि निवेशकों का शेयर बाजार पर भरोसा घट रहा है।
फंसा हुआ महसूस कर रहे निवेशक
तमाम निवेशक फिलहाल शेयरों और ऐसे इक्विटी म्यूचुअल फंड में फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं, जिन्होंने पिछले 4 महीने में पॉजिटिव की जगह नेगेटिव रिटर्न दिया है। इसके साथ ही उन्हें अब इनसे बाहर निकलने की कोई रणनीति समझ नहीं आ रही है। ऐसे में एक सवाल यह भी उठता है कि क्या बाजार मार्च की तरह बड़ी गिरावट की तरफ जा रहा है। अगर ऐसा है, तो निवेशक अपने पोर्टफोलियो को कैसे रीबैलेंस करें।
क्या है एक्सपर्ट की राय?
ET Now पर जाने-माने मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट और इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट संतोष राव ने ग्लोबल मार्केट्स को लेकर बड़ा अलर्ट दिया है। उनका कहना है कि इस समय दुनिया के बाजार “Wait & Watch” फेज में है, जहां निवेशक लगातार जियोपॉलिटिकल तनाव, क्रूड ऑयल की चाल और अमेरिकी इकोनॉमी के संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।
राव के मुताबिक, फिलहाल अमेरिकी बाजार मजबूत कॉर्पोरेट अर्निंग्स और स्थिर लेबर मार्केट के सहारे टिके हुए हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से सबसे बड़ा खतरा कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सप्लाई में बड़ी रुकावट आई तो क्रूड ऑयल 120 डॉलर से 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बाजार निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि हालात ज्यादा नहीं बिगड़ेंगे। लेकिन मार्केट पूरी तरह हेडलाइन ड्रिवन हो चुका है, जहां किसी भी जियोपॉलिटिकल अपडेट पर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए बढ़ता क्रूड सबसे बड़ा जोखिम माना जा रहा है, क्योंकि इससे महंगाई, रुपये पर दबाव और चालू खाते के घाटे पर असर पड़ सकता है।
क्या करें निवेशक?
बाजार की मौजूदा गिरावट में घबराकर एकमुश्त एग्जिट लेने की बजाय एक्सपर्ट्स पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि यह गिरावट सिर्फ भारतीय बाजार की नहीं, बल्कि ग्लोबल अनिश्चितता, महंगे क्रूड और जियोपॉलिटिकल तनाव का असर है। ऐसे में निवेशकों को जरूरत से ज्यादा मिडकैप और स्मॉलकैप एक्सपोजर घटाकर मजबूत बैलेंस शीट वाली लार्जकैप कंपनियों, खासतौर पर बैंकिंग, FMCG, डिफेंस और चुनिंदा फार्मा शेयरों पर फोकस बढ़ाना चाहिए।
इसके साथ ही पोर्टफोलियो में 10% से 20% तक कैश या कम जोखिम वाले डेट इंस्ट्रूमेंट रखने की सलाह दी जा रही है, ताकि बड़ी गिरावट में सस्ते वैल्यूएशन पर खरीदारी का मौका मिल सके। एक्सपर्ट्स SIP बंद करने को भी बड़ी गलती मान रहे हैं, क्योंकि इतिहास बताता है कि गिरावट के दौरान जारी रहने वाली SIP लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देती है। वहीं, जिन सेक्टर्स में valuations बहुत महंगे हो चुके हैं, वहां आंशिक मुनाफावसूली की सलाह दी जा रही है।
कहां जाएगा अब बाजार?
Santosh Rao के मुताबिक आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक क्रूड ऑयल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और पश्चिम एशिया की स्थिति तय करेगी। अगर कच्चा तेल 120 डॉलर के ऊपर जाता है, तो भारतीय बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि, 5 से 10 साल के नजरिए वाले निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स मौजूदा गिरावट को स्ट्रक्चरल कॉलेप्स नहीं, बल्कि करेक्शन फेज मान रहे हैं और मजबूत कंपनियों में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने की रणनीति को बेहतर बता रहे हैं।
डिस्क्लेमर: TimesNow Navbharat किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
