दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान-इजरायल संकट के बीच फ्रांस ने एक ऐसा चौंकाने वाला फैसला लिया है जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है। फ्रांस के केंद्रीय बैंक, 'बैंक डी फ्रांस' (Banque de France), ने अमेरिका की न्यूयॉर्क स्थित फेडरल रिजर्व की तिजोरियों से अपना सारा सोना वापस निकाल लिया है। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में भारत ने भी ब्रिटेन से अपना 100 टन से ज्यादा सोना वापस मंगाया था। फ्रांस का यह कदम न केवल उसकी अपनी आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि यह दुनिया भर के देशों के बीच अमेरिकी डॉलर और विदेशी तिजोरियों पर घटते भरोसे की ओर भी इशारा करता है। जब भी दुनिया में युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो देश अपनी सबसे सुरक्षित संपत्ति यानी सोने को अपने पास रखना पसंद करते हैं।
आखिर क्यों बेचा सोना?
इस फैसले के पीछे एक गहरा ऐतिहासिक कारण भी है, जो हमें साल 1971 के 'निक्सन शॉक' (Nixon Shock) की याद दिलाता है। उस समय भी फ्रांस ने डॉलर के बदले सोने की मांग की थी, जिसके बाद अमेरिका ने डॉलर को सोने से अलग कर दिया था। आज के समय में, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है और वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो रही है, फ्रांस को डर है कि कहीं भविष्य में आर्थिक प्रतिबंधों या डॉलर के उतार-चढ़ाव के कारण उसका सोना फंस न जाए। इसके अलावा, सोने की आसमान छूती कीमतों ने भी इसे एक 'गेम-चेंजर' बना दिया है। फ्रांस ने न्यूयॉर्क में रखे अपने सोने के भंडार को बेचकर उसे यूरोपीय बाजारों में फिर से निवेश करने की योजना बनाई है, जिससे उसे अरबों डॉलर का मुनाफा होने की उम्मीद है। यह पूरी तरह से अपनी संपत्ति पर नियंत्रण पाने और विदेशी निर्भरता को कम करने की एक सोची-समझी रणनीति है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रांस का यह कदम 'डी-डॉलराइजेशन' (De-dollarization) की प्रक्रिया को और तेज कर सकता है। जब फ्रांस जैसा बड़ा यूरोपीय देश अमेरिका से अपना सोना निकालता है, तो यह संदेश जाता है कि अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में शक्ति का संतुलन बदल रहा है। यह केवल एक आर्थिक लेन-देन नहीं है, बल्कि एक कूटनीतिक संदेश भी है कि संकट के समय में हर देश अपनी तिजोरी खुद संभालना चाहता है। अगर आने वाले समय में अन्य देश भी फ्रांस और भारत के नक्शेकदम पर चलते हैं, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व की साख और डॉलर की बादशाहत पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल, फ्रांस ने अपने इस सोने को सुरक्षित रूप से स्वदेश पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति और भी मजबूत हुई है।
इस देश में खरीदा भर भर कर सोना
फ्रांस ने पुराना सोना बेचने के बाद यूरोपियन मार्केट से अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला नया सोना खरीदा और उसे सीधे पेरिस में स्टोर किया। इस फैसले से फ्रांस को दोहरे फायदे हुए: एक तो ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा का खर्च बचा, दूसरा उसका गोल्ड रिजर्व बिना किसी जोखिम के आधुनिक स्टैंडर्ड में अपग्रेड हो गया।इस पूरी डील से फ्रांस को 12.8 अरब यूरो (करीब ₹1.38 लाख करोड़) का जबरदस्त मुनाफा हुआ। इसी का नतीजा है कि साल 2025 में 'बैंक डी फ्रांस' ने 8.1 अरब यूरो (लगभग ₹87,430 करोड़) का नेट प्रॉफिट कमाया, जबकि पिछले साल उसे 7.7 अरब यूरो का भारी नुकसान हुआ था। महज एक साल में बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है।
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