Food Inflation : पोषण पर महंगाई का हमला! वेज हो या नॉन वेज, हर थाली में प्रोटीन महंगा

देश में खाद्य महंगाई का असर पोषण पर सीधे तौर पर पड़ रहा है। पोषण का सबसे जरूरी हिस्सा प्रोटीन सबके लिए महंगा हो गया है। यहां देखें एक साल में प्रोटीन के प्रमुख स्रोत कितने महंगे हुए?

Food Inflation Vs Nutrition and Protein : महंगाई का असर अब सिर्फ रसोई के कुल बजट तक सीमित नहीं है। इसका असर इस बात पर भी पड़ रहा है कि आपकी थाली में प्रोटीन कितना और किस कीमत पर पहुंच रहा है। दाल हो या पनीर, अंडे हों या चिकन प्रोटीन के कई प्रमुख स्रोत पिछले एक साल में महंगे हुए हैं। इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ता है, जो सीमित बजट में रोजाना संतुलित और पौष्टिक खाना खाने की कोशिश करते हैं।

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खाद्य महंगाई बढ़ी

CPI और CRISIL के थाली इंडेक्स के डेटा के हिसाब से पिछले एक साल में शाकाहारी थाली की कुल लागत करीब 6-8%, जबकि मांसाहारी थाली की लागत 7-9% तक बढ़ी है। यानी वेज हो या नॉन-वेज, दोनों तरह की थाली में प्रोटीन का खर्च बढ़ा है। इसका महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि प्रोटीन शरीर की रोजाना जरूरत का जरूरी हिस्सा है। लेकिन जब दाल, अंडे, दूध, पनीर या चिकन जैसे खाद्य पदार्थ लगातार महंगे होते हैं, तो परिवार अक्सर मात्रा घटाने या सस्ते विकल्प तलाशने पर मजबूर हो सकते हैं।

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