क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी बिजनेस में फिलहाल स्विगी और जोमैटो के बीच कांटे की टक्कर जारी है। लेकिन, फ्लिपकार्ट ने इस मुकाबले को और दिलचस्प बनाने का मन बना लिया है। ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक फ्लिपकार्ट अब क्विक कॉमर्स के बाद जल्द ही फूड डिलीवरी बिजनेस में उतरने जा रही है। फ्लिपकार्ट की तैयारियों का असर स्विगी और जोमैटो के स्टॉक्स पर देखने को मिला है, जो गुरुवार को इंट्रा डे कारोबार में 3 फीसदी तक लुढ़क गए। हालांकि, दिन के आखिर में दोनों ही स्टॉक्स में रिकवरी भी देखने को मिली है। लेकिन, अब तक मोटे तौर पर डुओपॉली वाले इस बिजनेस में तीसरे बड़े खिलाड़ी की एंट्री का लॉन्ग टर्म असर देखने को मिल सकता है।
स्विगी जोमैटो के खेल में फ्लिपकार्ट की एंट्री
IPO से पहले बिजनेस विस्तार की नई रणनीति
इस साल संभावित IPO से पहले Flipkart अपने बिजनेस मॉडल को ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स से आगे बढ़ाकर नए सेक्टर में विस्तार देना चाहता है। बदलती उपभोक्ता मांग और फास्ट डिलीवरी ट्रेंड को देखते हुए कंपनी अब ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेगमेंट में दोबारा एंट्री की तैयारी कर रही है।
बेंगलुरु से पायलट लॉन्च की तैयारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी मई-जून के बीच बेंगलुरु में पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर सकती है। अगर शुरुआती नतीजे बेहतर रहे तो 2026 के आखिर या 2027 की शुरुआत में इसका बड़ा रोलआउट किया जा सकता है। करीब दो साल पहले भी Flipkart ने ONDC प्लेटफॉर्म के जरिए फूड डिलीवरी में उतरने की योजना बनाई थी, लेकिन वह शुरुआती चर्चाओं से आगे नहीं बढ़ सकी थी।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच नया मौका
भारत में ऑनलाइन फूड डिलीवरी बाजार तेजी से बढ़ रहा है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक FY2024 में लगभग 30.8 अरब डॉलर के इस बाजार के FY2032 तक करीब 120 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, यानी करीब 18.5% की सालाना वृद्धि दर। फिलहाल बाजार पर Zomato और Swiggy का दबदबा है, लेकिन 10-मिनट कैफे-स्टाइल डिलीवरी और ONDC आधारित मॉडल जैसे नए फॉर्मेट तेजी से उभर रहे हैं। ऐसे में Flipkart को अपने लॉजिस्टिक्स और यूजर बेस का फायदा मिल सकता है।
IPO से पहले घरेलू स्ट्रक्चर मजबूत
Flipkart ने दिसंबर में NCLT से सिंगापुर से भारत में कानूनी डोमिसाइल शिफ्ट करने की मंजूरी हासिल की थी, जो उसके संभावित IPO के लिए बड़ा कदम माना गया। बिजनेस इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म Tofler के मुताबिक FY25 में Flipkart India का कंसोलिडेटेड घाटा बढ़कर 5,189 करोड़ रुपये हो गया, जो FY24 में 4,248 करोड़ रुपये था। हालांकि ऑपरेशंस से रेवेन्यू 17.3% बढ़कर 82,787 करोड़ रुपये पहुंच गया, लेकिन खर्च भी 17.4% बढ़कर 88,121 करोड़ रुपये हो गया, जिससे घाटा बढ़ा।
क्यों अहम है यह कदम?
IPO से पहले Flipkart के लिए नए हाई-ग्रोथ सेगमेंट में एंट्री निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत बन सकती है। अगर कंपनी फूड डिलीवरी जैसे रोजमर्रा की खपत वाले सेक्टर में सफल रहती है, तो लिस्टिंग से पहले इसकी वैल्यूएशन स्टोरी और मजबूत हो सकती है।
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