Mutual Funds : भारतीय शेयर बाजार पिछले एक साल से दबाव में है। कमजोर कॉर्पोरेट नतीजों, सुस्त घरेलू खपत, प्रतिकूल टैरिफ फैसलों और कमजोर होती मुद्रा के कारण बेंचमार्क सूचकांक - सेंसेक्स और निफ्टी - करीब 5% गिर चुके हैं। इसका असर म्यूचुअल फंड्स पर भी पड़ा है। इक्विटी म्यूचुअल फंड्स की विभिन्न श्रेणियों पर नजर डालें तो तस्वीर पूरी तरह से निराशाजनक है। फ्लेक्सी-कैप फंड्स की कहानी भी कुछ अलग नहीं है। इस कैटेगरी के 41 फंड्स में से केवल 3 ने ही पिछले एक साल में निवेशकों को पॉजिटिव रिटर्न दिया है। बाकी सभी फंड्स ने 19% तक निगेटिव रिटर्न दिया है।
फ्लेक्सी-कैप फंड्स की स्थिति (तस्वीर-istock)
पिछले एक साल में भारतीय इक्विटी मार्केट दबाव में रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांक करीब 5% गिर गए हैं। इसके पीछे कमजोर कॉर्पोरेट नतीजे, धीमी घरेलू खपत, प्रतिकूल टैरिफ फैसले और मुद्रा की कमजोरी मुख्य कारण रहे हैं। इसका असर म्यूचुअल फंड्स पर भी पड़ा है।
फ्लेक्सी-कैप फंड्स की स्थिति
फ्लेक्सी-कैप फंड्स की 41 फंड्स में से केवल 3 ही पिछले एक साल में पॉजिटिव रिटर्न दे पाए हैं। बाकी सभी ने 19% तक का नकारात्मक रिटर्न दिया है।
- Parag Parikh Flexi Cap Fund: 3.36%
- HDFC Flexi Cap Fund: 2.05%
- Helios Flexi Cap Fund: 1.97%
अन्य म्यूचुअल फंड कैटेगरी
- लार्ज-कैप फंड्स: केवल 1 फंड पॉजिटिव
- मिड-कैप फंड्स: 2 फंड पॉजिटिव
- स्मॉल-कैप फंड्स: 1 फंड पॉजिटिव
- लार्ज और मिड-कैप फंड्स: 2 फंड पॉजिटिव
- करीब सभी कैटेगरी में भारी नुकसान हुआ है।
फ्लेक्सी-कैप फंड्स का लॉन्ग टर्म प्रदर्शन
हालांकि फ्लेक्सी-कैप फंड्स ने एक साल में कमजोर प्रदर्शन किया है, लेकिन लंबी अवधि में ये अच्छे रिटर्न देते रहे हैं। Parag Parikh Flexi Cap Fund और HDFC Flexi Cap Fund ने 3 और 5 साल के वार्षिक रिटर्न 20% से ऊपर दिए हैं। Helios Flexi Cap Fund के पास लंबी अवधि का डाटा उपलब्ध नहीं है क्योंकि इसका समयावधि अभी 1 साल 10 महीने है।
निवेशकों के लिए सीख
म्यूचुअल फंड्स में निवेश करते समय सिर्फ हालिया रिटर्न को देखकर निर्णय लेना सही नहीं होता। रिटर्न केवल पिछले प्रदर्शन को दर्शाते हैं, भविष्य की गारंटी नहीं। इसलिए, फंड चुनते वक्त इसके स्ट्रैटेजी, फंड मैनेजमेंट, जोखिम प्रोफाइल और अपने निवेश के लक्ष्य को ध्यान में रखना जरूरी है।
(Disclaimer: यह लेख केवल सूचना देने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है और इसे किसी प्रकार की निवेश सलाह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल अपने पाठकों/दर्शकों को सलाह देता है कि किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।)
