शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों या FIIs की गतिविधि हर समय निवेशकों की निगाह में रहती है, क्योंकि उनके पैसे का आना-जाना बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है। साल 2025 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार से कुल ₹1.66 लाख करोड़ से अधिक की बिकवाली की, जो एक चिंताजनक संकेत था। निवेशक इस तरह की भारी बिकवाली को अक्सर बाजार से भागने की निशानी मानते हैं। ऐसे समय पर जब FIIs नेट सेलिंग कर रहे हों, तो घरेलू निवेशकों में डर और अनिश्चितता फैलती है। इसका असर बाजार की रैलियों पर दिखता है, शेयरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है और निवेशकों की रणनीति प्रभावित होती हैं।
बीते हफ्ते कितनी की बिकवाली?
बीते सप्ताह भी विदेशी निवेशकों ने दो सत्रों में करीब ₹7,608 करोड़ की बिकवाली की, जिससे बाजार में फिर से हलचल बनी हुई है। यह बिकवाली एक बार फिर निवेशकों के मन में सवाल उठा रही है कि क्या FIIs अब भारतीय बाजार से और पैसा निकाल रहे हैं या उनका रुख बदलने वाला है। हालांकि, इन आंकड़ों को सिर्फ एक नकारात्मक संकेत के रूप में नहीं लिया जा सकता। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में निवेश की दिशा बदल सकती है और FIIs फिर से बाजार में लौट सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय यह है कि 2025 की बिकवाली के पीछे ग्लोबल आर्थिक परिस्थितियां, महंगाई, ब्याज दरों की नीतियां और जोखिमों से बचने के लिए निवेशकों का सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करना जैसे कारण शामिल थे। 2025 में दुनिया भर के बाजारों में बॉन्ड यील्ड उच्च रहे, अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ धीमी रही और कई देशों में ब्याज दरों में कटौती नहीं हुई। इन परिस्थितियों ने FIIs को रिटर्न की तलाश में दूसरी मार्केट्स की ओर आकर्षित किया। ऐसे समय में भारतीय शेयर बाजार की वैल्युएशन कई क्षेत्रों में ऊंची देखने को मिली, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट ऑप्शन्स आकर्षक लगे।
2026 में क्या होगा?
लेकिन 2026 की शुरुआत में वैश्विक आर्थिक संकेत बदलने लगे हैं। कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों में कटौती की संभावना बढ़ रही है, ऊर्जा और कच्चे माल की कीमतें स्थिर हो रही हैं और कई देशों की अर्थव्यवस्था में रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं। इन बदलावों ने FIIs को फिर से रिटर्न की तलाश में इक्विटी मार्केट की ओर आकर्षित किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक हो सकता है क्योंकि FIIs जब बाजार में आते हैं, तो यह लिक्विडिटी, सेंटीमेंट और मूल्य समर्थन दोनों प्रदान करते हैं।
इसके अलावा भारत में कुछ सेक्टरों के मूलभूत आंकड़े अभी भी मजबूत बने हुए हैं। जैसे कि बैंकिंग, उपभोक्ता वस्तुएं, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में दीर्घकालिक विकास की अपील बनी हुई है। ऐसी कंपनियां जो मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर नकद प्रवाह दिखा रही हैं, उनमें FIIs फिर से निवेश के लिए रुचि दिखा सकते हैं। इससे बाजार की धारणा सकारात्मक बने रहने में मदद मिल सकती है।
