FII Buying Indian Share Market : दिवाली से पहले विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में जमकर खरीदारी की है। लंबे समय तक भारतीय बाजार से दूरी बनाने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का रुख अचानक बदल गया है। महज 5 कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 5 अरब डॉलर से ज्यादा करीब ₹50,000 करोड़ की खरीदारी की है। गुरुवार को तो FIIs ने अकेले करीब ₹15,000 करोड़ के शेयर खरीद डाले। यह एक साल से ज्यादा समय में उनकी सबसे बड़ी एक दिन की खरीदारी बताई जा रही है।
विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ खरीदारी
विदेशी निवेशकों की इस अचानक वापसी ने बाजार में नई जान फूंक दी है। गुरुवार को Sensex करीब 2.6% उछल गया, जबकि शुक्रवार सुबह भी बाजार में तेजी जारी रही। खास बात यह है कि जब अमेरिकी और एशियाई बाजारों में टेक्नोलॉजी शेयरों की भारी बिकवाली हो रही है, तब भारतीय बाजार में विदेशी निवेशक पैसा लगा रहे हैं। आखिर ऐसा क्या बदल गया कि FIIs भारतीय शेयरों की दिवाली शॉपिंग में जुट गए हैं? इसके पीछे 5 बड़ी वजहें हैं।
AI शेयरों की चमक फीकी
विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजार में लौटने की सबसे बड़ी वजह वैश्विक AI ट्रेड में आई कमजोरी मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई थी। Nvidia से लेकर सैमसंग और दूसरी चिप कंपनियों तक में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया। लेकिन, अब AI पर कंपनियों के भारी-भरकम खर्च को लेकर सवाल उठने लगे हैं। निवेशकों को चिंता है कि क्या डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे खरबों डॉलर के निवेश से उतनी कमाई हो पाएगी, जितनी उम्मीद की जा रही है? इसी चिंता के कारण Nasdaq में करीब 5.5% की गिरावट आई। Nvidia का शेयर 9.3% तक टूट गया। जापान का Nikkei करीब 7% और दक्षिण कोरिया का Kospi 9% से ज्यादा गिर गया।
भारत एंटी एआई ट्रेड जोन
ग्लोबल इक्विटी मार्केट इन्वेस्टर्स के बीच भारत एक Anti-AI Trade जोन के तौर पर देखा जा रहा है। इसका मतलब है कि भारत वैश्विक AI रैली का बड़ा प्रत्यक्ष लाभार्थी नहीं रहा, इसलिए AI शेयरों से निकलने वाला पैसा दूसरे बाजारों का रुख कर सकता है। भारत और ब्राजील जैसे उभरते बाजारों को इस बदलाव का फायदा मिलने की उम्मीद है। इस साल AI ट्रेड में कम एक्सपोजर वाले क्षेत्रीय शेयर बाजारों को निवेशकों के पोर्टफोलियो में बदलाव का फायदा मिल रहा है।
कंपनियों के शानदार नतीजों ने बढ़ाया भरोसा
भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने की दूसरी बड़ी वजह कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजे हैं। अब तक नतीजे घोषित कर चुकी Nifty 50 कंपनियों का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 19% बढ़ा है। यह Kotak Institutional Equities के अनुमानों से 4% अधिक है। ब्रोकरेज की कवरेज में शामिल कंपनियों का नेट प्रॉफिट भी 18% बढ़ा है, जो अनुमान से 3% ज्यादा है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। महंगे क्रूड के कारण पिछले कुछ समय से भारत का आयात बिल बढ़ रहा था। इसके साथ महंगाई, रुपये की कमजोरी और चालू खाते के घाटे को लेकर भी चिंताएं थीं। ब्रोकरेज फर्म Nomura का मानना है कि कमोडिटी कीमतों में नरमी, बेहतर कॉरपोरेट कमाई और वैश्विक परिस्थितियों में सुधार से भारतीय बाजार की निवेश आकर्षकता बढ़ रही है।
भारतीय शेयरों का वैल्यूएशन हुआ आकर्षक
विदेशी निवेशकों की वापसी की एक और बड़ी वजह भारतीय शेयर बाजार का अपेक्षाकृत आकर्षक वैल्यूएशन है। पिछले दो वर्षों में भारतीय बाजार ने कई दूसरे वैश्विक बाजारों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन किया है। इस दौरान विदेशी निवेशकों ने भी भारी बिकवाली की थी। सितंबर तक भारतीय बाजार से विदेशी निवेशक करीब 3 लाख करोड़ रुपये की नेट बिकवाली कर चुके थे।
बैंकिंग, फाइनेंशियल टेक और ऑटो पर नजर
विदेशी निवेशकों की खरीदारी में एक खास पैटर्न भी दिखाई दे रहा है। वे फिलहाल छोटे शेयरों के बजाय बड़े और मजबूत कंपनियों पर ज्यादा भरोसा दिखा रहे हैं।
Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार के मुताबिक, फाइनेंशियल, टेक्नोलॉजी और ऑटो शेयरों में आगे भी तेजी की गुंजाइश है। उनके अनुसार, बेहतर कमाई और वैश्विक बाजारों में निवेश के बदलते रुझान के बीच विदेशी निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है।
उदय कोटक ने भी बताया भारतीय बाजार क्यों खास?
Kotak Mahindra Bank के संस्थापक उदय कोटक ने भी वैश्विक AI निवेश में संभावित सुस्ती को भारत के लिए एक अवसर बताया है। उनका मानना है कि वैश्विक कंपनियां AI की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जिस स्तर पर कर्ज ले रही हैं, उससे कई मामलों में कंपनियों का वैल्यूएशन जरूरत से ज्यादा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि अगर AI निवेश की रफ्तार में कमी आती है और वैश्विक निवेशक दूसरे बाजारों में बेहतर अवसर तलाशते हैं, तो भारत को इसका फायदा मिल सकता है।
