Akshaya Tritiya 2025: जैसे-जैसे अक्षय तृतीया करीब आ रही है, वैसे-वैसे ही सोने को लेकर चर्चा बढ़ रही है। इसका साफ कारण है - पिछले एक साल में सोने की कीमत में 47% की वृद्धि हुई है, जो अप्रैल 2024 में $2,285 से बढ़कर अप्रैल 2025 में $3,371 हो गई है। भारत में इंट्राडे स्पॉट रेट 99,000 रुपये तक पहुँच गया, जो 2022 के मध्य से लगभग दोगुना है। पहली नजर में, ऐसा लगता है कि सोना स्पष्ट विजेता है। यानी इसने निवेशकों को खुश कर दिया है। लेकिन निवेशकों को गोल्ड के नंबरों से परे भी देखना चाहिए। यानी केवल गोल्ड पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
इस अक्षय तृतीया पर सोने में निवेश करें
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केवल सोने में निवेश करना जोखिम भरा
सोना हमेशा से आर्थिक उथल-पुथल और करेंसी में अस्थिरता के दौरान निवेशकों के लिए एक सेफ निवेश ऑप्शन रहा है। हाल के महीनों में सोने की कीमतों में जोरदार वृद्धि देखी गई है। जनवरी-मार्च 2025 तिमाही में दिल्ली में सोने की स्पॉट कीमतें 16.7% बढ़ीं, जबकि सेंसेक्स में 1.3% की गिरावट
लेकिन जानकार चेतावनी देते हैं कि केवल सोने में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। एक संतुलित पोर्टफोलियो में 5-15% सोना, इतनी ही मात्रा में शॉर्ट-टर्म बॉन्ड, और बाकी हिस्सा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय इक्विटी में निवेश करना चाहिए। इससे डायवर्सिफिकेशन बनी रहती है और बाजार की अस्थिरता से बचा जा सकता है।
कितनी हुई गोल्ड की खरीदारी
वैश्विक रुझान और सोने की मांग
सोने की मांग में वैश्विक स्तर पर उछाल देखा जा रहा है। कोरोना महामारी के बाद रिटेल गोल्ड का बाजार फिर से बढ़ता आ रहा है। पश्चिमी निवेशकों में भी गोल्ड ईटीएफ में आउटफ्लो का ट्रेंड बदला है और 2020 के बाद पहली बार उन्होंने निवेश बढ़ाया है।
केंद्रीय बैंकों ने भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण सोने का भंडारण बढ़ाया है। पिछले साल वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने लगातार तीसरे साल 1,000 टन से अधिक सोना खरीदा, जो रूसी एसेट्स को फ्रीज किए जाने के बाद डॉलर रिजर्व में कम हुए विश्वास को दर्शाता है।
कैसे करें गोल्ड में निवेश
अमेरिकी आर्थिक चुनौतियां और सोना
अमेरिका में बढ़ती मुद्रास्फीति, टैरिफ वॉर, और 28 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज को उच्च ब्याज दरों पर रिफाइनेंस करने की चुनौती एक बड़ी समस्या का संकेत देती है। इससे जोखिम वाली एसेट्स पर असर पड़ सकता है, जिससे सोना न केवल एक हेज (बचाव) बल्कि एक सुरक्षित आश्रय बन जाता है।
यानी सोने में निवेश जरूरी है, मगर जैसा कि ऊपर जिक्र किया गया है, एक सीमा तक ही गोल्ड में निवेश करें।
सोने में निवेश के विकल्प
फिजिकल गोल्ड के बजाय, निवेशक गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड फंड चुन सकते हैं, जो अधिक सुरक्षित और लिक्विड हैं। इंटरनेशनल लेवल पर भी कई गोल्ड फंड मौजूद हैं।
वॉरेन बफेट की सलाह
लॉन्ग टर्म के लिए निवेश और सही संतुलन
जानकार मानते हैं कि सोने का हालिया प्रदर्शन प्रभावशाली है, लेकिन पोर्टफोलियो में 10% से अधिक सोना रखना जोखिम भरा हो सकता है। बीते 50 वर्षों में सोना केवल 12 बार एसएंडपी 500 (US Stock Exchange) से 20% से अधिक बेहतर प्रदर्शन कर पाया है।
दुनिया के फेमस इंवेस्टर वॉरेन बफेट का सुझाव है कि डर के माहौल में लालची बनें। लॉन्ग टर्म इक्विटी निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव में धैर्य रखना चाहिए। पिछले 30 वर्षों में एसएंडपी 500 के 10 बेस्ट दिनों को छोड़ने से रिटर्न आधा हो जाता, और 30 बेस्ट दिनों को छोड़ने से 83% रिटर्न कम हो जाता। भारत में, सेंसेक्स के 40 बेस्ट दिनों को छोड़ने से रिटर्न 67% कम हो सकता है। इससे सही अंदाजा लगाएं कि आपके हाथ में क्या बचता
पोर्टफोलियो मैनेजर की तरह सोचें
डायवर्सिफिकेशन और स्ट्रेटेजी
नए निवेशकों के लिए, रुपये की लागत औसत (नियमित छोटी राशि का निवेश) अस्थिरता को कम करती है। लॉन्ग टर्म रिटर्न के लिए, एसएंडपी 500 ने 1960 के दशक से 12% सालाना रिटर्न दिया है, जबकि सेंसेक्स ने 1979 से 15% CAGR (चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) दिया है।
इसलिए इस अक्षय तृतीया, एक पोर्टफोलियो मैनेजर की तरह सोचें, न कि ट्रेंड फॉलोअर की तरह। संतुलन ही आपकी सबसे बड़ी संपत्ति है।
