EPFO का बड़ा फैसला: 12 साल बाद बहाल किया पुराना नियम, बढ़ जाएगी आपकी पेंशन! जानें क्यों?

EPFO के इस फैसले का मतलब है कि सिर्फ वही कर्मचारी फायदा उठाने के लायक हैं जिन्होंने 2014 के बदलाव से पहले ज्यादा योगदान का ऑप्शन चुना था। यह ऑप्शन एम्प्लॉयर की मंजूरी पर भी निर्भर करता है, क्योंकि कर्मचारी अपने एम्प्लॉयर की मंजूरी के बिना खुद से इसे नहीं चुन सकते। इस तरह, इसका दायरा ज्यादातर उन पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) या ऑर्गनाइजेशन तक ही सीमित है जो पहले ज्यादा योगदान के लिए सहमत हुए थे।

EPFO news: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला लिया है। EPFO ने अपने 12 साल पुराने नियम को फिर से बहाल कर दिया है। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) ने एम्प्लॉई पेंशन स्कीम (EPS) कंट्रीब्यूशन को पूरी बेसिक सैलरी से जोड़ने का पुराना ऑप्शन फिर से शुरू कर दिया है, जिसके तहत कुछ एम्प्लॉई अपनी असल बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) के आधार पर अपनी पेंशन में कंट्रीब्यूट कर सकते थे। यह कदम 2014 के अमेंडमेंट द्वारा लगाई गई रोक को पलटता है, जिसमें पेंशनेबल सैलरी को 15,000 रुपये तक लिमिट किया गया था, जिससे लंबे समय से EPFO सब्सक्राइबर के लिए पेंशन कैलकुलेट करने के तरीके पर असर पड़ा है। माना जा रहा है कि इस फैसले से कर्मचारियों के पेंशन में बढ़ोतरी होगी।

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इस बदलाव से मुख्य रूप से उन लोगों को फायदा होगा जिन्होंने कट-ऑफ डेट से पहले ज्यादा EPS कंट्रीब्यूशन का ऑप्शन चुना था। इस कदम से बड़े सब्सक्राइबर बेस के बजाय एक तय ग्रुप को राहत मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, EPFO का यह फैसला लंबे समय से चल रहे कन्फ्यूजन के बाद आया है, जो तब से था जब प्रोविडेंट फंड बॉडी ने सितंबर 2014 में पेंशन वाली सैलरी की लिमिट तय की थी। अभी पेंशन वाली सैलरी की लिमिट 15,000 रुपये है।

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