रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की हालिया मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद उन लाखों लोगों को थोड़ी निराशा हाथ लगी है, जो अपने होम लोन की EMI घटने का इंतजार कर रहे थे। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखने का फैसला किया है, जिसका सीधा मतलब है कि फिलहाल बैंकों की तरफ से ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं होने वाली। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना आरबीआई की मदद के भी आप अपने होम लोन का बोझ कम कर सकते हैं? जी हां, कुछ स्मार्ट वित्तीय रणनीतियों को अपनाकर आप न केवल अपनी EMI का तनाव कम कर सकते हैं, बल्कि लोन की अवधि खत्म होने तक लाखों रुपये का ब्याज भी बचा सकते हैं।
50 लाख के लोन पर 20 लाख की बचत
होम लोन को जल्दी खत्म करने और ब्याज बचाने का सबसे सरल तरीका है 'सालाना एक अतिरिक्त EMI' का भुगतान। इसे एक उदाहरण से समझते हैं—मान लीजिए आपने 8.5% की ब्याज दर पर 50 लाख रुपये का होम लोन 25 साल के लिए लिया है। इस हिसाब से आपकी मासिक EMI 40,261 रुपये बनती है और पूरे 25 साल में आप कुल 1.21 करोड़ रुपये (मूलधन + ब्याज) चुकाते हैं। यानी आप 50 लाख के लोन पर करीब 71 लाख रुपये सिर्फ ब्याज में दे देते हैं। लेकिन, यदि आप हर साल सिर्फ एक अतिरिक्त EMI (40,261 रुपये) जमा करते हैं, तो आपके ब्याज का बोझ करीब 18 से 20 लाख रुपये तक कम हो सकता है। यह छोटी सी बचत आपके लोन के कई साल घटा देती है।
प्री-पेमेंट
होम लोन के शुरुआती सालों में आपकी EMI का एक बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ ब्याज चुकाने में चला जाता है, जबकि मूलधन (Principal Amount) बहुत धीमी गति से कम होता है। ऐसे में 'पार्ट प्री-पेमेंट' (Part Pre-payment) का विकल्प किसी वरदान से कम नहीं है। जब भी आपको ऑफिस से बोनस मिले, कोई निवेश मैच्योर हो या अतिरिक्त आमदनी हो, तो उस रकम को अपने लोन खाते में जमा कर दें। इससे आपका मूलधन सीधे तौर पर कम हो जाता है, जिससे आगे लगने वाला ब्याज अपने आप घट जाता है। बीच-बीच में किया गया छोटा-छोटा प्री-पेमेंट भविष्य में आपके लाखों रुपये बचा सकता है और आपको कर्ज मुक्त जीवन की ओर ले जाता है।
कम टेन्योर और स्मार्ट स्विचिंग
लोन लेते समय अक्सर लोग छोटी EMI के चक्कर में लंबा टेन्योर (जैसे 25 या 30 साल) चुन लेते हैं, जो सबसे बड़ी गलती साबित होती है। आप जितना लंबा समय चुनेंगे, बैंक आपसे उतना ही ज्यादा ब्याज वसूल करेगा। कोशिश करें कि लोन का समय (Tenure) जितना हो सके कम रखें और EMI उतनी ही रखें जितनी आप आसानी से चुका सकें। इसके अलावा, हमेशा अपने क्रेडिट स्कोर पर नजर रखें। अगर आपका क्रेडिट स्कोर 750-800 से ऊपर है, तो आप अपने बैंक से ब्याज दर कम करने के लिए मोलभाव कर सकते हैं। अगर कोई दूसरा बैंक आपको कम ब्याज दर पर 'होम लोन ट्रांसफर' की सुविधा दे रहा है, तो वहां स्विच करने में संकोच न करें।
