ED Action On Anil Ambani Reliance Group : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी के रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने करीब 1,885 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनली अटैच) किया है। यह कार्रवाई रिलायंस समूह से जुड़े कई बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच के तहत की गई है। आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक ईडी ने बुधवार को जारी बयान में बताया कि यह कदम रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL), यस बैंक धोखाधड़ी मामला और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) से जुड़े बैंक फ्रॉड मामलों के सिलसिले में उठाया गया है।
अनिल अंबानी समूह पर ईडी का शिकंजा (तस्वीर-PTI)
किन संपत्तियों को किया गया कुर्क
आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक ईडी द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की कई अहम हिस्सेदारियां शामिल हैं। इनमें बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड और मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड में कंपनी की हिस्सेदारी शामिल है। इसके अलावा, वैल्यू कॉर्प फाइनेंस एंड सिक्योरिटीज लिमिटेड के नाम पर मौजूद 148 करोड़ रुपये की बैंक राशि और 143 करोड़ रुपये की देनदारियां (रिसीवेबल्स) भी कुर्क की गई हैं। ईडी ने यह भी बताया कि रिलायंस समूह के वरिष्ठ कर्मचारी अंगराई सेतुरामन के नाम पर एक आवासीय मकान और पुनीत गर्ग के नाम पर मौजूद शेयर व म्यूचुअल फंड निवेश को भी अस्थायी रूप से अटैच किया गया है।
पहले ही कुर्क हो चुकी हैं 10,000 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियां
ईडी के मुताबिक, इससे पहले भी रिलायंस समूह से जुड़े मामलों में 10,117 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। मौजूदा कार्रवाई के बाद अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कुल कुर्की राशि करीब 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
जांच में क्या सामने आया
ईडी की जांच में सामने आया है कि RCOM, RCFL, RHFL, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर समेत समूह की कई कंपनियों ने सार्वजनिक धन का गलत इस्तेमाल किया और बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी की। ईडी के अनुसार, 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने RHFL में 2,965 करोड़ रुपये और RCFL में 2,045 करोड़ रुपये का निवेश किया था। दिसंबर 2019 तक ये दोनों निवेश एनपीए (गैर-निष्पादित संपत्ति) बन गए। उस समय RHFL पर 1,353.50 करोड़ रुपये और RCFL पर 1,984 करोड़ रुपये बकाया थे।
‘घुमावदार रास्ते’ से पहुंचाया गया सार्वजनिक धन
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि RHFL और RCFL को 11,000 करोड़ रुपये से अधिक का सार्वजनिक धन मिला। ईडी के मुताबिक, यस बैंक के निवेश से पहले बैंक को रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड से बड़ी रकम प्राप्त हुई थी। सेबी के नियमों के तहत हितों के टकराव के कारण रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड सीधे अनिल अंबानी समूह की वित्तीय कंपनियों में निवेश नहीं कर सकता था। इसलिए सार्वजनिक धन को यस बैंक के जरिए घुमावदार तरीके से इन कंपनियों तक पहुंचाया गया।
कर्ज लेकर कर्ज चुकाने का खेल
ईडी ने बताया कि इस मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर भी जांच की जा रही है। जांच में पता चला है कि 2010-2012 के बाद RCOM और उसकी समूह कंपनियों ने देश-विदेश के बैंकों से बड़े पैमाने पर कर्ज लिया। इन कर्जों में से करीब 40,185 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं। नौ बैंकों ने इन खातों को धोखाधड़ी (फ्रॉड) घोषित किया है। ईडी के अनुसार एक बैंक से लिए गए कर्ज का इस्तेमाल दूसरे बैंकों का कर्ज चुकाने, संबंधित पक्षों को पैसा देने और म्यूचुअल फंड में निवेश करने में किया गया, जो कर्ज की शर्तों का सीधा उल्लंघन है।
एवरग्रीनिंग और विदेशों में धन भेजने के आरोप
जांच में सामने आया कि 13,600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि कर्ज को “एवरग्रीन” करने में इस्तेमाल की गई। वहीं 12,600 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम संबंधित पक्षों को दी गई और करीब 1,800 करोड़ रुपये एफडी और म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए, जिन्हें बाद में समूह की कंपनियों में वापस भेज दिया गया। ईडी ने यह भी बताया कि बिल डिस्काउंटिंग का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया और कुछ कर्ज राशि विदेशों में भी भेजी गई। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है।
