क्या कंपनी का लॉस मतलब आपकी ग्रेच्युटी का लॉस? जानें आपको कैसे वापस मिलेगा आपका पैसा

कई बार कंपनियां घाटे का हवाला देकर ग्रेच्युटी देने में आनाकानी करती हैं, लेकिन क्या कानून वास्तव में उन्हें ऐसा करने की अनुमति देता है? आइए आपको बताते हैं कंपनी अगर लॉस में जाती है तो आपको कैसे ग्रैच्युटी का पैसा वापस मिल सकता है?

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के मन में अक्सर यह डर बना रहता है कि जिस कंपनी में वे सालों से सेवा दे रहे हैं, अगर वह अचानक घाटे में चली जाए या दिवालिया (Bankrupt) हो जाए, तो उनकी जमा पूंजी का क्या होगा? रिटायरमेंट के समय मिलने वाली 'ग्रेच्युटी' (Gratuity) एक बड़ी राशि होती है, जो कर्मचारी के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का आधार बनती है। कई बार कंपनियां घाटे का हवाला देकर ग्रेच्युटी देने में आनाकानी करती हैं, लेकिन क्या कानून वास्तव में उन्हें ऐसा करने की अनुमति देता है? असलियत यह है कि भारतीय कानून कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए बेहद सख्त है। आइए आपको बताते हैं कंपनी अगर लॉस में जाती है तो आपको कैसे ग्रैच्युटी का पैसा वापस मिल सकता है?

Gratuity

ग्रेच्युटी एक्ट 1972 और आपकी सिक्योरिटी

भारत में 'पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972' (Payment of Gratuity Act) के तहत यह स्पष्ट है कि यदि किसी संस्थान में 10 या उससे अधिक कर्मचारी काम करते हैं, तो वह संस्थान ग्रेच्युटी देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। ग्रेच्युटी का हकदार वह कर्मचारी होता है जिसने कंपनी में कम से कम 5 साल की निरंतर सेवा पूरी की हो। कानून की सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी का मुनाफा या घाटा इस भुगतान को प्रभावित नहीं करता। ग्रेच्युटी कोई 'बोनस' या 'इनाम' नहीं है जो कंपनी अपनी मर्जी से दे, बल्कि यह कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है।

दिवालिया होने पर क्या होता है?

जब कोई कंपनी दिवालिया घोषित होती है, तो 'इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड' (IBC) के तहत उसकी संपत्तियों को बेचकर कर्जदारों का पैसा चुकाया जाता है। यहाँ कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि ग्रेच्युटी और भविष्य निधि (PF) का पैसा कंपनी की संपत्ति का हिस्सा नहीं माना जाता। इसे एक अलग 'ट्रस्ट' या फंड की तरह देखा जाता है। कानून के मुताबिक, जब संपत्तियों की नीलामी होती है, तो कर्मचारियों के बकाया वेतन और ग्रेच्युटी को सबसे पहले प्राथमिकता दी जाती है। यानी बैंक या अन्य लेनदारों को पैसा मिलने से पहले कर्मचारियों का हक चुकाया जाना अनिवार्य है।

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