वित्त वर्ष 2025-26 के खत्म होने के साथ ही इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय आ गया है। बहुत से लोगों को लगता है कि टैक्स रिटर्न सिर्फ उन्हीं को भरना होता है जिनकी सैलरी बहुत ज्यादा होती है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। आयकर नियमों के मुताबिक, कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं जहां आपकी कमाई भले ही टैक्स के दायरे में न आती हो, फिर भी आपके लिए ITR फाइल करना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाता है। अगर आप इन नियमों की अनदेखी करते हैं, तो आपको टैक्स विभाग की तरफ से नोटिस मिल सकता है और आप बड़ी मुश्किल में फंस सकते हैं। इसलिए यह समझना बहुत जरूरी है कि किन स्थितियों में आपको रिटर्न दाखिल करना ही होगा।
सिर्फ सैलरी ही नहीं अगर इन 9 तरीकों से की है कमाई तो भी भरना होगा ITR
किसे भरना होगा ITR?
सबसे पहले बात करते हैं कि सामान्य तौर पर कितनी कमाई पर ITR से छूट मिलती है। अगर आपने सरकार की नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को चुना है और आपकी सालाना कमाई 4 लाख रुपये से कम है, तो आपके लिए रिटर्न भरना अनिवार्य नहीं है। वहीं, अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) के तहत टैक्स कैलकुलेट कर रहे हैं, तो यह सीमा 2.5 लाख रुपये सालाना है। इसके अलावा, कुछ खास लोगों को भी इससे छूट दी गई है, जैसे कि वे नाबालिग बच्चे जिनकी आय उनके माता-पिता की कमाई में जोड़ दी जाती है, या फिर ऐसे एनआरआई (NRI) जिनकी भारतीय आय पर पहले ही पूरी तरह से टीडीएस (TDS) कट चुका है।
कब फंस सकते हैं आप?
लेकिन असली पेंच इसके बाद आता है। आयकर विभाग ने कुछ ऐसे कड़े नियम बनाए हैं, जिनके दायरे में आने पर आपको हर हाल में ITR भरना पड़ेगा, चाहे आपकी सालाना इनकम जीरो ही क्यों न हो। उदाहरण के लिए, अगर आपने सालभर के दौरान अपने एक या एक से अधिक करंट अकाउंट (Current Account) में कुल मिलाकर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जमा की है, तो आप पर यह नियम लागू होता है। इसी तरह, अगर आपके सेविंग्स अकाउंट (Savings Account) में पूरे साल के दौरान 50 लाख रुपये या उससे अधिक की रकम जमा हुई है, तो भी आपको टैक्स रिटर्न भरना होगा।
इन 8 शर्तों में फाइल करना होगा
करंट अकाउंट में भारी जमा: अगर आपने एक या एक से अधिक चालू खातों (Current Accounts) में पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान कुल मिलाकर 1 करोड़ रुपये से अधिक की नकद राशि जमा की है।
सेविंग्स अकाउंट में बड़ी रकम: अगर आपने अपने एक या एक से अधिक बचत खातों (Savings Accounts) में सालभर में 50 लाख रुपये या उससे अधिक की कुल जमा की है।
बिजनेस टर्नओवर: अगर आप कोई व्यापार करते हैं और आपके व्यवसाय का कुल सालाना टर्नओवर, बिक्री या सकल प्राप्ति 60 लाख रुपये से अधिक है।
प्रोफेशनल कमाई: अगर आप एक प्रोफेशनल (जैसे डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट आदि) हैं और आपकी सालाना ग्रॉस रिसीट (Gross Receipts) 10 लाख रुपये से अधिक रही है।
विदेश यात्रा का खर्च: अगर आपने स्वयं या किसी अन्य व्यक्ति की विदेश यात्रा पर एक वित्तीय वर्ष के दौरान कुल 2 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की है।
बिजली का बिल: अगर पूरे वर्ष के दौरान आपके घर या व्यावसायिक परिसर का कुल बिजली का खर्च 1 लाख रुपये से अधिक रहा है।
TDS या TCS की सीमा: अगर आपका सालभर में कटा हुआ TDS या TCS कुल 25,000 रुपये से अधिक है (वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 50,000 रुपये है)।
विदेशी संपत्ति: अगर आप भारत के निवासी हैं और आपके पास विदेश में कोई संपत्ति (जैसे अचल संपत्ति) है या आप विदेश में स्थित किसी बैंक खाते के हस्ताक्षरकर्ता (Signatory) हैं।
