डिजिटल गोल्ड को लेकर बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने भले ही साफ चेतावनी जारी की हो, लेकिन निवेशकों का रुझान इस ओर कम होता नहीं दिख रहा है। खासकर युवा निवेशक और पहली बार निवेश करने वाले लोग लगातार डिजिटल गोल्ड में पैसा लगा रहे हैं। हालात यह हैं कि साल 2025 के सिर्फ 11 महीनों में भारतीयों ने 12 टन से ज्यादा डिजिटल गोल्ड खरीद लिया है। यह आंकड़ा अपने आप में चौंकाने वाला है, क्योंकि सेबी पहले ही कह चुका है कि डिजिटल गोल्ड उसके दायरे में रेगुलेटेड नहीं है।
क्या थी सेबी की चेतावनी
मार्केट रेगुलेटर सेबी ने 8 नवंबर 2025 को एक एडवाइजरी जारी कर निवेशकों को आगाह किया था। सेबी ने साफ कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और ऐप्स पर ‘डिजिटल गोल्ड’ या ‘ई-गोल्ड’ के नाम से बेचे जा रहे प्रोडक्ट्स सेबी द्वारा रेगुलेटेड नहीं हैं। ये न तो कमोडिटी डेरिवेटिव्स के तहत आते हैं और न ही किसी दूसरे रेगुलेटेड फ्रेमवर्क के अंतर्गत।
सेबी ने यह भी स्पष्ट किया था कि अगर कोई निवेशक ऐसे ऐप या प्लेटफॉर्म से डिजिटल गोल्ड खरीदता है, जो सेबी में रजिस्टर्ड नहीं है, और बाद में उस प्लेटफॉर्म पर कोई तकनीकी समस्या आती है या कंपनी दिवालिया हो जाती है, तो निवेशकों के पैसे की जिम्मेदारी सेबी की नहीं होगी। आसान शब्दों में कहें तो डिजिटल गोल्ड में फंसे पैसे की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है।
फिर भी क्यों बढ़ रही है डिजिटल गोल्ड की खरीद
सेबी के अलर्ट के बावजूद डिजिटल गोल्ड की मांग लगातार बढ़ी है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से नवंबर 2025 के बीच भारतीय निवेशकों ने 12 टन से अधिक डिजिटल गोल्ड खरीदा। यह अनुमान नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के UPI ट्रांजैक्शन डेटा पर आधारित है, जिसे इस साल पहली बार सार्वजनिक किया गया।
मुंबई में मौजूदा स्पॉट प्राइस के हिसाब से देखें तो 12 टन 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 16,670 करोड़ रुपये बैठती है। तुलना करें तो साल 2024 में भारतीयों ने लगभग 8 टन डिजिटल गोल्ड खरीदा था। यानी एक साल में डिजिटल गोल्ड की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है।
निवेशकों को क्यों पसंद आ रहा डिजिटल गोल्ड
डिजिटल गोल्ड की सबसे बड़ी खासियत इसकी आसान पहुंच है। इसमें निवेश की शुरुआत सिर्फ 1 रुपये से की जा सकती है। न तो सोना घर लाने की जरूरत होती है और न ही लॉकर या स्टोरेज की चिंता। खरीद-बिक्री पूरी तरह ऑनलाइन होती है और जरूरत पड़ने पर तुरंत लिक्विडिटी मिल जाती है।
यही वजह है कि यह विकल्प खासतौर पर युवाओं, मिलेनियल्स और जेन Z को पसंद आ रहा है। ऐप और फिनटेक प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश करना इनके लिए आसान और सुविधाजनक है। इसके अलावा, कई लोग इसे फिजिकल गोल्ड के आधुनिक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।
सेबी की चेतावनी का कितना असर
हालांकि सेबी की चेतावनी के बाद कुछ निवेशक सतर्क जरूर हुए हैं और डिजिटल गोल्ड की खरीद में थोड़ी सुस्ती भी देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर इसका बड़ा असर नजर नहीं आया। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि अभी भी बड़ी संख्या में लोग यह मानकर निवेश कर रहे हैं कि डिजिटल गोल्ड पूरी तरह सुरक्षित है।
इसी बीच, इंडस्ट्री में यह मांग भी तेज हो गई है कि डिजिटल गोल्ड के लिए एक साफ और मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डिजिटल गोल्ड को रेगुलेट किया जाता है और निवेशकों को स्पष्ट नियमों के तहत सुरक्षा मिलती है, तो यह निवेश का एक भरोसेमंद विकल्प बन सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है सबक
डिजिटल गोल्ड में निवेश से पहले यह समझना जरूरी है कि यह सेबी रेगुलेटेड प्रोडक्ट नहीं है। आसान निवेश और कम रकम की सुविधा भले ही इसे आकर्षक बनाती हो, लेकिन जोखिम को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वे किसी भी प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी विश्वसनीयता, नियमों और जोखिमों को अच्छी तरह समझ लें।
