आज के समय में घर खरीदना किसी भी परिवार का बड़ा सपना होता है, लेकिन उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में हजारों खरीदारों को बिल्डर की वजह से परेशानी झेलनी पड़ती है। कहीं फ्लैट का पजेशन सालों तक लटका रहता है, तो कहीं घटिया कंस्ट्रक्शन, लीकेज, खराब मटीरियल और अधूरे काम से लोग परेशान होते हैं। ऐसे मामलों में खरीदार अक्सर खुद को असहाय महसूस करते हैं। इन्हीं समस्याओं से राहत दिलाने के लिए सरकार ने साल 2016 में रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, यानी RERA लागू किया था।
RERA क्या है और क्यों बनाया गया?
RERA एक ऐसा कानून है, जिसका मकसद रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाना और घर खरीदारों के अधिकारों की रक्षा करना है। इस कानून के तहत तय साइज से बड़े हर रिहायशी और कमर्शियल प्रोजेक्ट को अपने राज्य की RERA अथॉरिटी में रजिस्टर कराना जरूरी होता है। रजिस्ट्रेशन के दौरान बिल्डर को प्रोजेक्ट की टाइमलाइन, नक्शे, अप्रूवल, फंड इस्तेमाल और पजेशन की तारीख जैसी पूरी जानकारी देनी होती है। इससे खरीदार को यह भरोसा मिलता है कि बिल्डर मनमानी नहीं कर सकता और अगर नियम टूटते हैं, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव है।
किन मामलों में खरीदार RERA में शिकायत कर सकता है?
अगर बिल्डर ने तय समय पर घर नहीं दिया है, तो यह RERA के तहत सीधा मामला बनता है। इसके अलावा, कंस्ट्रक्शन में खराबी, घटिया मटीरियल का इस्तेमाल, वादे के मुताबिक सुविधाएं न देना, प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी छुपाना या बिना बताए नक्शे में बदलाव करना भी शिकायत के दायरे में आता है। खरीदार ऐसे मामलों में रिफंड, ब्याज, मुआवजा या जल्द पजेशन की मांग कर सकता है।
RERA में शिकायत करना कितना आसान है?
RERA में शिकायत दर्ज करना अब काफी आसान और ऑनलाइन हो गया है। इसके लिए आपको किसी बड़े वकील या लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होती। आप खुद घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
सबसे पहले आपको उस राज्य के RERA पोर्टल पर जाना होता है, जहां आपकी प्रॉपर्टी स्थित है। जैसे उत्तर प्रदेश के लिए up-rera.in और महाराष्ट्र के लिए maharera.maharashtra.gov.in। हर राज्य की अपनी अलग RERA वेबसाइट होती है।
ऐसे करें शिकायत
RERA पोर्टल पर पहुंचने के बाद आपको “Register” या “File Complaint” विकल्प पर क्लिक करना होता है। यहां आपको शिकायतकर्ता यानी Complainant के रूप में रजिस्ट्रेशन करना होता है। नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी सही-सही भरें। इसके बाद लॉग-इन करके अपनी प्रोफाइल पूरी करें।
अब Complaint सेक्शन में जाकर यह चुनें कि आपका प्रोजेक्ट RERA में रजिस्टर्ड है या नहीं। फिर प्रोजेक्ट का नाम, RERA रजिस्ट्रेशन नंबर, फ्लैट या यूनिट नंबर, एरिया, बिल्डर की जानकारी, अब तक किया गया भुगतान, बुकिंग और एग्रीमेंट की तारीख जैसी सभी डिटेल भरें। साथ ही अपनी समस्या और आप क्या राहत चाहते हैं जैसे रिफंड, ब्याज या पजेशन यह साफ शब्दों में लिखें।
जरूरी डॉक्यूमेंट और फीस
शिकायत के साथ आपको कुछ जरूरी दस्तावेज भी अपलोड करने होते हैं। इनमें पहचान पत्र, बिल्डर-बायर एग्रीमेंट, पेमेंट रसीदें और बिल्डर से हुई ईमेल या मैसेज बातचीत शामिल हो सकती है। ये सभी दस्तावेज PDF फॉर्मेट में अपलोड किए जाते हैं।
शिकायत दर्ज करने के लिए मामूली फीस भी देनी होती है। आमतौर पर यह करीब 1,000 रुपये अथॉरिटी फीस और 5,000 रुपये एडजुडिकेटिंग ऑफिसर फीस होती है, जिसे ऑनलाइन UPI, नेट बैंकिंग या कार्ड से जमा किया जा सकता है।
फैसला कितने समय में आता है?
RERA कानून के मुताबिक शिकायतों का निपटारा समयबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए। आमतौर पर कुछ महीनों के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुना दिया जाता है, हालांकि समय केस की जटिलता पर निर्भर करता है।
खरीदार को क्या राहत मिल सकती है?
अगर शिकायत सही पाई जाती है, तो RERA बिल्डर को देरी पर ब्याज देने, कंस्ट्रक्शन की खामियां ठीक करने या खरीदार को मुआवजा देने का आदेश दे सकता है। कुछ मामलों में पूरे पैसे रिफंड करने का भी निर्देश दिया जाता है।
