देशभक्ति का बिजनेस मॉडल: सदर बाजार के सबसे पुराने 'फ्लैग हाउस' इस सीजन में अब तक बेचे 30 लाख झंडे

Tiranga Flags Business: दिल्ली के सदर बाजार में 'भारत हैंडलूम क्लॉथ हाउस' की तीसरी पीढ़ी आजादी के 80वें पर्व पर तिरंगे बना रही है। 'फ्लैग अंकल' गफ्फार की विरासत संभालता यह परिवार इस सीजन 30 लाख झंडे बेच चुका है।

Tricolor Flags Business : देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस (80th Independence Day) से ठीक पहले राजधानी दिल्ली का मशहूर सदर बाजार पूरी तरह से तिरंगे के रंगों में रंग चुका है। बाजार की गलियों में देशभक्ति का अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है। दुकानों में तिरंगे कपड़ों के बड़े-बड़े रोल रखे हुए हैं और सिलाई मशीनें लगातार चल रही हैं। तैयार किए गए राष्ट्रीय ध्वज देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजने के लिए तेजी से पैक किए जा रहे हैं। इसी हलचल के बीच सदर बाजार में स्थित है 'भारत हैंडलूम क्लॉथ हाउस', जो राष्ट्रीय ध्वज बनाने वाली सबसे पुरानी दुकानों में से एक मानी जाती है।

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1962 के युद्ध से 30 लाख तिरंगों की बिक्री तक: सदर बाजार के सबसे पुराने 'फ्लैग हाउस' की सफलता की कहानी (तस्वीर-AI)

पीढ़ियों से चला आ रहा राष्ट्रीय ध्वज बनाने का सफर

'भारत हैंडलूम क्लॉथ हाउस' को चलाने वाला परिवार कई पीढ़ियों से देश के लिए तिरंगा बनाने का काम कर रहा है। इस परिवार का नाता आजादी के आंदोलन के दिनों से ही झंडे बनाने के काम से रहा है। दुकान संभालने वाले अब्दुल मलिक बताते हैं कि आजादी की लड़ाई के दौरान उनके दादा और पिता बंगाल से खादी का कपड़ा मंगवाकर झंडे तैयार करते थे। देश की आजादी के बाद भी यह परंपरा जारी रही। साल 1962 में, जब भारत और चीन का युद्ध चल रहा था, उसी दौरान इस परिवार ने सदर बाजार में अपनी इस छोटी सी दुकान की शुरुआत की थी।

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