जातिगत जनगणना के साथ टैक्सपेयर्स का डेटा भी हो सार्वजनिक, CTI की मांग

Taxpayer Data: सीटीआई ने जातिगत जनगणना के साथ टैक्सपेयर्स का डेटा सार्वजनिक करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि टैक्स योगदान के आधार पर नीतियों में प्रतिनिधित्व और हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

Taxpayer Data: देश में होने जा रही जातिगत जनगणना (caste census) के बीच व्यापारिक संगठनों ने एक नई मांग उठाई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कहा है कि जातिगत आंकड़ों के साथ-साथ टैक्सपेयर्स का डेटा भी सामने लाया जाए। 16 अप्रैल 2026 को ही संसद में गृह मंत्री अमित शाह ने जातिगत जनगणना कराने की घोषणा की है। इसके बाद विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्गों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। व्यापारिक संगठनों ने भी इस पर अपनी राय रखनी शुरू कर दी है।

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टैक्सपेयर्स डेटा सार्वजनिक करने की मांग (तस्वीर-istock)

‘जितना टैक्स, उतनी हिस्सेदारी’ का दिया प्रस्ताव

सीटीआई ने अपने पत्र में कहा है कि देश में जो वर्ग ज्यादा टैक्स देता है, उसे नीतियों और योजनाओं में उसी अनुपात में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। संगठन का तर्क है कि आर्थिक योगदान को भी नीति निर्माण में शामिल किया जाना चाहिए।

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