Crude Oil Import : मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने गुरुवार (27 मार्च 2026) को स्पष्ट किया कि उसने हाल ही में ईरान से कोई कच्चा तेल नहीं खरीदा है। कंपनी ने मीडिया में चल रही खबरों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया। बयान में कहा गया कि रिलायंस ने अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने के बाद भी ईरान से तेल की कोई खरीददारी नहीं की है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ईरान से तेल खरीद की खबरों को किया खारिज (तस्वीर-istock)
अमेरिका के प्रतिबंध और उनका प्रभाव
अमेरिका ने 2018 में ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इसके कारण भारत सहित कई देशों ने ईरान से तेल का आयात रोक दिया था। उस समय भारत ईरान से कच्चे तेल का बड़ा खरीदार था और कुल आयात में इसका हिस्सा लगभग 11.5 प्रतिशत था। लेकिन 2019 में मई से आयात पूरी तरह बंद हो गया। इसके बाद भारत ने तेल की आपूर्ति पश्चिम एशिया, अमेरिका और अन्य देशों से करना शुरू कर दी। हाल ही में अमेरिका ने ईरान और इजराइल के बीच युद्ध की वजह से तेल की कीमतों में आई तेजी को नियंत्रित करने के लिए ईरानी तेल की समुद्री खरीद पर लगे प्रतिबंधों को 30 दिन के लिए हटा दिया। अनुमान है कि समुद्र में लगभग 14 करोड़ बैरल ईरानी तेल जहाजों में मौजूद है।
भारत की रणनीति और तकनीकी व्यवहारिकता
सरकार ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि ईरान से तेल की खरीद फिर से शुरू करना पूरी तरह तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहारिकता पर निर्भर करेगा। इसका मतलब है कि सिर्फ तब ही आयात होगा जब यह आर्थिक और रिफाइनरी के हिसाब से उचित लगे। इतिहास में भारत ईरान से तेल का प्रमुख खरीदार रहा है। इसका कारण था कि ईरानी तेल भारत की रिफाइनरियों के अनुकूल था और व्यापार की शर्तें भी लाभकारी थीं। प्रतिबंधों से पहले भारत के लिए यह एक आसान और भरोसेमंद विकल्प था।
रिलायंस का स्पष्ट बयान
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बयान में कहा कि कंपनी ईरान से कच्चे तेल की हालिया मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह खारिज करती है। कंपनी ने दोहराया कि अमेरिका के प्रतिबंधों में छूट मिलने के बाद भी उसने ईरान से तेल नहीं खरीदा। इस बयान का उद्देश्य अफवाहों को खत्म करना और स्पष्ट करना है कि फिलहाल कोई आयात नहीं हो रहा है।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के लिए ईरान से तेल की खरीद फिर से शुरू करना केवल तभी संभव होगा जब कीमतें, व्यापारिक शर्तें और रिफाइनरी की जरूरतें सभी अनुकूल हों। अगर ऐसा होता है, तो भारत फिर से ईरान के तेल पर निर्भर हो सकता है, लेकिन फिलहाल यह केवल एक संभावना है। इस पूरी स्थिति का असर तेल की वैश्विक कीमतों और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट और युद्ध के कारण बढ़ी कीमतों के बीच भारत को तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई विकल्पों पर ध्यान देना होगा।
कुल मिलाकर, रिलायंस ने साफ कर दिया है कि अभी तक ईरान से कोई तेल नहीं आया है। भारत की रणनीति तकनीकी और आर्थिक व्यवहारिकता पर निर्भर रहेगी, और भविष्य में ही तय होगा कि ईरान से तेल आयात फिर शुरू होगा या नहीं।
