क्रूड की आग से धधकी महंगाई, 8.3% उछाल के साथ 42 महीने के शीर्ष स्तर पर WPI

क्रूड ऑयल में तेजी का असर महंगाई के आंकड़ों में दिखने लगा है। खुदरा महंगाई के एक साल के शीर्ष पर पहुंचने के बाद थोक महंगाई करीब 42 महीने के शीर्ष पर पहुंच गई है।

WPI Inflation : भारत में थोक महंगाई ने अप्रैल 2026 में बड़ा झटका दिया है। Wholesale Price Index (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 8.3% पर पहुंच गई, जो पिछले 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। मार्च में यह आंकड़ा 3.88% था। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने ईंधन, ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग लागत को बढ़ा दिया, जिससे पूरे सप्लाई चेन पर दबाव दिखने लगा है। यह तेजी अगस्त 2022 के आखिर के बाद से होलसेल प्राइस महंगाई में सबसे ज्यादा है और ऐसे समय में आई है, जब पूरी दुनिया पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और इंपोर्टेड महंगाई के कंज्यूमर कीमतों पर असर डालने की संभावना से जूझ रहे हैं।

WPI Inflation

थोक महंगाई में इजाफा

Crude Oil बना महंगाई का सबसे बड़ा कारण

अप्रैल में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई दर 67.18% तक पहुंच गई, जो मार्च में 35.98% थी। सिर्फ क्रूड पेट्रोलियम की महंगाई 88.06% पर पहुंच गई, जबकि मार्च में यह 51.57% थी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ग्लोबल सप्लाई चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिसका असर सीधे भारत की थोक महंगाई पर दिखा।

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