बैंक अकाउंट, FD, म्यूचुअल फंड (Mutual Fund), शेयर, इंश्योरेंस और EPF में निवेश करते समय अक्सर लोग नॉमिनी जरूर जोड़ते हैं। लेकिन केवल नॉमिनी का नाम दर्ज कर देना ही काफी नहीं है। समय के साथ परिवार की परिस्थितियां बदलती रहती हैं और ऐसे में नॉमिनी को लेकर पुरानी डिटेल्स समय के साथ पहले की तरह उपयोगी नहीं रह जाती। इसलिए नॉमिनी को लेकर कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है-
Nominee को लेकर भूलकर भी न करें ये गलतियां (Photo: iStock)
एक बार नॉमिनी बनाकर भूल न जाएं
नॉमिनी को लेकर एक सबसे आम गलती यही है कि लोग अकाउंट खोलते समय नॉमिनी का नाम दर्ज कर भूल जाते हैं। समय के साथ जीवन की परिस्थितियां बदलती जाती हैं और इस डिटेल को लोग चेक ही नहीं करते। लेकिन शादी, बच्चे का जन्म या गोद लेना, तलाक, नॉमिनी की मृत्यु या परिवार में किसी बड़े बदलाव के बाद पुराने नॉमिनेशन को अपडेट करने की जरूरत पड़ सकती है।
इसलिए अपने सभी बैंक अकाउंट, FD, म्यूचुअल फंड, डीमैट अकाउंट, इंश्योरेंस पॉलिसी और EPF की एक लिस्ट बनाकर समय-समय पर नॉमिनी की जानकारी चेक करनी चाहिए।
एक जगह का नॉमिनी हर जगह लागू नहीं होता
कई लोग मान लेते हैं कि अगर बैंक अकाउंट में किसी व्यक्ति को नॉमिनी बना दिया है, तो वही व्यक्ति उनके सभी निवेशों का नॉमिनी होगा। ऐसा जरूरी नहीं है। बैंक अकाउंट का नॉमिनेशन म्यूचुअल फंड, शेयर, डीमैट अकाउंट या इंश्योरेंस पॉलिसी पर अपने आप लागू नहीं होता। अलग-अलग फाइनेंशियल प्रोडक्ट और संस्थानों में नॉमिनी दर्ज करने की अलग प्रक्रिया हो सकती है। इसलिए हर निवेश और वित्तीय खाते में नॉमिनेशन की स्थिति अलग से जांचना जरूरी है।
नाबालिग बच्चे को नॉमिनी बनाते समय सावधानी
कई माता-पिता अपने छोटे बच्चे को नॉमिनी बना देते हैं। इसमें कोई समस्या नहीं है, लेकिन बच्चे के नाबालिग होने की स्थिति में पैसे को संभालने के लिए अभिभावक या अधिकृत व्यक्ति की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए अगर किसी नाबालिग बच्चे को नॉमिनी बनाया जा रहा है, तो संबंधित फाइनेंशियल प्रोडक्ट के नियमों के अनुसार गार्जियन या उस व्यक्ति की जानकारी भी सही तरीके से दर्ज करनी चाहिए, जो बच्चे की ओर से रकम प्राप्त या संभाल सके।
नॉमिनी और कानूनी वारिस एक नहीं होते
नॉमिनी को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि जिस व्यक्ति का नाम नॉमिनी में दर्ज है, वही व्यक्ति उस संपत्ति का अंतिम मालिक बन जाएगा। ऐसा जरूरी नहीं है। नॉमिनेशन मुख्य रूप से मृत्यु के बाद संपत्ति या रकम को प्राप्त करने या ट्रांसफर की प्रक्रिया को आसान बनाने का माध्यम है। कानूनी तौर पर संपत्ति का अंतिम अधिकार उत्तराधिकार कानून और अन्य लागू नियमों पर निर्भर कर सकता है।
