658 से 3000 रुपए के पार! 18 सालों में कैसे लगी कमर्शियल LPG गैस की कीमतों में आग?

भारत में पिछले दो दशकों में महंगाई ने आम आदमी से लेकर व्यापारियों तक की कमर तोड़ दी है। विशेष रूप से कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में आई भारी तेजी ने होटल, रेस्टोरेंट और छोटे ढाबा संचालकों के बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है।

मई के पहले दिन ही कमर्शियल LPG ग्राहकों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। गैस सिलेंडर की कीमतें 1000 रुपए तक की भारी बढ़ोतरी के साथ अब 3000 के जादुई आंकड़े को पार कर गई हैं। भारत में पिछले दो दशकों में बढ़ती महंगाई ने आम जनता से लेकर व्यापारियों तक की कमर तोड़ दी है। विशेष रूप से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर (19 kg cylinder price) की कीमतों में आई इस बेलगाम तेजी ने होटल, रेस्टोरेंट और छोटे ढाबा संचालकों के मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है। अगर हम पीछे मुड़कर देखें, तो साल 2008 में जिस सिलेंडर की कीमत महज ₹658 के आसपास हुआ करती थी, उसका 2026 में ₹3000 के पार पहुंच जाना पिछले 18 वर्षों के एक ऐसे सफर को बयां करता है जिसने भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था को गहरे तक प्रभावित किया है।

LPG gas Cylinder

क्यों लगी कीमतों में आग?

कमर्शियल गैस के दामों में इस कदर इजाफा होने के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार रहे हैं। सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में होने वाली उठापटक है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल और गैस आयात करता है, इसलिए वैश्विक तनाव या युद्ध जैसी स्थितियों का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है। हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया है, जिससे गैस की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी देखने को मिली है।

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