नौकरी बदली है? खुद-ब-खुद मर्ज नहीं होंगे आपके EPF अकाउंट्स, ऐसे झट से करें मर्ज

नौकरी बदलने के बाद EPF बैलेंस ट्रांसफर करना जरूरी नहीं है, लेकिन इससे रिटायरमेंट की बचत को एक जगह रखने, लगातार सर्विस रिकॉर्ड बनाए रखने और भविष्य में क्लेम, पैसे निकालने और सेटलमेंट को आसान बनाने में मदद मिलती है।

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले अक्सर दो से 5 साल में नौकरी बदलते हैं। आमतौर पर नौकरी बदलने के साथ नई कंपनी में नया प्रोविडेंट फंड अकाउंट (PF) खोला जाता है। नई कंपनी इस अकाउंट में पीएफ कंट्रीब्यूशन का पैसा जमा करती है। वहीं, पुराना अकाउंट अपने-आप नए खाते में मर्ज नहीं होता है। अगर आपने भी नौकरी बदली है और पुराना पीएफ अकाउंट को मर्ज नहीं किया तो बता दें कि यह अपने आप नहीं होगा। आपको इसको करना होगा। जानकारों का कहना है कि नौकरी बदलने के बाद EPF ट्रांसफर करना जरूरी नहीं है, फिर भी पुराने अकाउंट से मौजूदा अकाउंट में बैलेंस ट्रांसफर करना फायदेमंद माना जाता है।

PF

ईपीएफ

पुराने EPF अकाउंट को मर्ज करने से क्या फायदा होता है?

EPF बैलेंस ट्रांसफर करने का एक मुख्य फायदा अकाउंट को बेहतर ढंग से मैनेज करना है। रिटायरमेंट की बचत को एक ही जगह रखने से कई तरह की दिक्कतों से बचा जा सकता है, जैसे कि इनएक्टिव अकाउंट, पैसे निकालने में देरी और अलग-अलग मेंबर ID में फैले कॉन्ट्रिब्यूशन को ट्रैक करने में होने वाली परेशानी। एक और बड़ा फ़ायदा यह है कि ट्रांसफर करने पर कर्मचारी की पिछली कंपनी की सर्विस हिस्ट्री भी साथ आ जाती है। इससे यह पक्का होता है कि सर्विस के साल गिने जाते रहते हैं, न कि नई कंपनी के साथ जीरो से शुरुआत करनी पड़ती है। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि लगातार 5 साल की सर्विस के बाद ही EPF से पैसे निकालने पर कोई टैक्स नहीं लगता।

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